उत्तर प्रदेश

सिर पर सेहरा, हाथ में तलवार और घोड़ी पर सवार दुल्हन: प्रयागराज में जब पिता ने बेटे की तरह निकाली लाडो की बारात, तो पूरा शहर देखता रह गया

संगम नगरी प्रयागराज ने एक ऐसा नजारा देखा जिसने साबित कर दिया कि जमाना बदल रहा है। हम अक्सर शादियों में दूल्हे को घोड़ी चढ़ते और बारात लाते देखते हैं,लेकिन शहर केकीडगंजइलाके में कुछ ऐसा हुआ जिसने पुरानी रीतियों को पीछे छोड़ दिया। यहाँ एक पिता ने अपनी बेटी की बारात ऐसी शान-ओ-शौकत से निकाली कि देखने वालों की भीड़ लग गई।पिता का प्यार और समाज को सन्देशयह कहानी है कीडगंज के रहने वालेराजेशजी की। उनकी पांच बेटियां हैं,और उन्होंने कभी बेटे की कमी महसूस नहीं की। अपनी चौथी बेटीतनुकी शादी में उन्होंने तय किया कि उनकी लाडो किसी शहजादे से कम नहीं है। बस फिर क्या था,पिता ने ठाना कि विदाई से पहले बेटी की बारात निकलेगी—बिल्कुल वैसे ही जैसे बेटों की निकलती है।हाथ में तलवार और चेहरे पर’स्वैग’जब बारात सड़कों पर निकली,तो माहौल देखने लायक था। आगे डीजे और बैंड-बाजा बज रहा था,और पीछे घोड़ी पर सवार थी दुल्हन तनु।अनोखा रूप:तनु के हाथ में एक तलवार थी और चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास।माहौल:क्या छतें और क्या दुकानें,हर कोई अपना काम छोड़कर इस अनोखी बारात को मोबाइल में कैद करने लगा। लड़की वाले और लड़के वाले,दोनों ही पक्षों ने मिलकर जमकर डांस किया।क्रिकेट के मैदान से घोड़ी तकतनु सिर्फ एक दुल्हन ही नहीं,बल्कि एक शानदारक्रिकेट खिलाड़ीभी हैं। उन्होंने कई लोकल टूर्नामेंट्स में अपनी बैटिंग से नाम कमाया है। उनकी दिलेरी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शादी के कार्ड पर पहले ही छाप दिया गया था कि “दुल्हन की बारात निकलेगी”। लोगों को पहले से उत्सुकता थी कि आखिर ये कैसे होगा?राजेश जी ने अपनी बेटी की बारात निकालकर समाज को एक बड़ा सन्देश दिया है कि’कन्यादान’करने का मतलब बेटी को बोझ समझना नहीं,बल्कि उसे मान-सम्मान के साथ विदा करना है। संगम नगरी में निकली यह बारात अब एक इतिहास बन गई है।

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