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थलपति विजय सरकार का बड़ा दांव: तमिलनाडु में 800 करोड़ का निवेश करेगी Ultraviolette, 3000 युवाओं को मिलेगा रोजगार

भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में तेजी से उभरती हुई टू-व्हीलर निर्माता कंपनी Ultraviolette Automotive ने तमिलनाडु में अपने बड़े विस्तार का ऐलान किया है। राज्य की औद्योगिक नीतियों और बेहतर कारोबारी माहौल के बीच कंपनी ने होसुर-शूलागिरी (क्रिस्टगिरि) क्षेत्र में अपनी एक विशाल नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए लगभग ₹779 करोड़ (करीब ₹800 करोड़) के भारी-भरकम निवेश का फैसला किया है। अगले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से होने वाले इस निवेश से दक्षिण भारत के इस राज्य में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।

तमिलनाडु में ईवी सेक्टर को बढ़ावा और हजारों नए रोजगार के अवसर

इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कंपनी होसुर में अपनी नई 'बिगगा' (BIGGA) फैक्ट्री का निर्माण कर रही है। इस प्लांट के शुरू होने से तमिलनाडु में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2,000 से 3,000 नए रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। स्थानीय युवाओं और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों के लिए यह सुनहरा मौका साबित होगा। राज्य सरकार के साथ हुए इस समझौते को तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। ओला और एथर जैसी कंपनियों के बाद अब अल्ट्रावायलेट के आने से होसुर एक प्रमुख ईवी हब के रूप में और अधिक तेजी से उभर रहा है।

शुरुआती उत्पादन क्षमता और भविष्य की बड़ी योजनाएं

इस अत्याधुनिक प्लांट की शुरुआती उत्पादन क्षमता सालाना करीब 2.5 लाख (2,50,000) इलेक्ट्रिक वाहनों की होगी। बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग और ग्राहकों के रुझान को देखते हुए भविष्य में इस क्षमता को बढ़ाकर दोगुना यानी 5 लाख यूनिट सालाना किया जा सकेगा। कंपनी का यह नया निवेश मुख्य रूप से उसके मास-मार्केट सेगमेंट और नए मॉडलों के उत्पादन को गति देने के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में बेंगलुरु के पास स्थित प्लांट के अलावा यह नई फैक्ट्री कंपनी के स्केल को एक अलग ही स्तर पर ले जाएगी।

प्रीमियम मोटरसाइकिलों के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में धमाकेदार एंट्री

अल्ट्रावायलेट अब तक अपनी हाई-परफॉर्मेंस और प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों जैसे F77 के लिए पहचानी जाती रही है। लेकिन इस नए निवेश और प्लांट के जरिए कंपनी अब मास-मार्केट और किफायती सेगमेंट में भी अपने पैर पसारने जा रही है। कंपनी आने वाले समय में अपनी बहुप्रतीक्षित 'शॉकवेव' (Shockwave) मोटरसाइकिल और 'टेसरेक्ट' (Tesseract) इलेक्ट्रिक स्कूटर को बाजार में उतारने की तैयारी में है। कंपनी की योजना इन स्कूटर्स और बाइकों को बजट-फ्रेंडली कीमतों पर पेश करने की है, जिससे घरेलू बाजार में ओला इलेक्ट्रिक और एथर जैसी दिग्गज कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलेगी।

ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनेगा तमिलनाडु का नया प्लांट

यह नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट केवल भारत की घरेलू जरूरतों को ही पूरा नहीं करेगा, बल्कि इसे एक बड़े इंटरनेशनल एक्सपोर्ट हब के रूप में भी विकसित किया जाएगा। कंपनी की योजना अपने कुल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा यूरोप और लैटिन अमेरिका समेत दुनिया के लगभग 20 से अधिक देशों में निर्यात करने की है। वर्तमान में कंपनी के कुल सेल्स में ग्लोबल एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है, जो इस नए प्लांट के पूरी तरह चालू होने के बाद बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए होसुर को चुनने के पीछे कंपनी का मुख्य उद्देश्य बेंगलुरु स्थित उनके रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर से इसकी नजदीकी और मजबूत ऑटोमोटिव सप्लायर नेटवर्क का फायदा उठाना है। सरकार के ई-मोबिलिटी विजन और देश में तेजी से बदलते ऑटो सेक्टर के बीच अल्ट्रावायलेट का यह बड़ा दांव भारत के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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