मानसून में चिपचिपी त्वचा और मुंहासों से पाएं हमेशा के लिए छुटकारा: डर्मेटोलॉजिस्ट द्वारा सुझाए गए ये 5 स्किनकेयर टिप्स हैं बेहद असरदार

बारिश की बूंदें भले ही गर्मी से राहत दिलाती हैं, लेकिन वायुमंडल में अत्यधिक नमी (ह्यूमिडिटी) त्वचा के लिए कई नई चुनौतियां खड़ी कर देती है। लखनऊ, कानपुर, दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे भारतीय शहरों में मानसूनी हवाओं के साथ उमस अपने चरम पर पहुंच जाती है। इस दौरान त्वचा की सेबेशियस ग्रंथियां सामान्य से अधिक तेल (सीबम) का स्राव करने लगती हैं। अत्यधिक सीबम पसीने और वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म धूलकणों के साथ मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देता है। बंद रोमछिद्रों में बैक्टीरिया पनपते हैं, जिससे चेहरे पर जिद्दी मुंहासे, ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स और फंगल इन्फेक्शन तेजी से फैलने लगते हैं। त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दिनों में सर्दियों या गर्मियों वाला पुराना स्किनकेयर रूटीन काम नहीं आता, बल्कि इस मौसम में त्वचा के पीएच बैलेंस को स्थिर रखने के लिए विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
सलिसीक्लिक एसिड और नीम आधारित क्लींजर से करें डीप पोर क्लींजिंग
मानसून में त्वचा को दिन में कम से कम दो बार एक सही फेसवॉश से साफ करना अनिवार्य है। अत्यधिक क्रीमी या हैवी मॉइस्चराइजिंग क्लींजर का उपयोग करने से बचें क्योंकि ये त्वचा की सतह पर एक अतिरिक्त चिकनाई छोड़ जाते हैं। इसके बजाय, 1% से 2% सैलिसिलिक एसिड (बीएचए) या टी ट्री ऑयल और नीम के प्राकृतिक अर्क से युक्त फोमिंग क्लींजर का चुनाव करें। सैलिसिलिक एसिड तेल में घुलनशील होता है, जो रोमछिद्रों की गहराई में जाकर जमे हुए अतिरिक्त सीबम और डेड स्किन सेल्स को पूरी तरह बाहर निकालता है। ध्यान रखें कि चेहरे को बार-बार धोने की गलती न करें, क्योंकि दिन में तीन बार से अधिक फेसवॉश इस्तेमाल करने से त्वचा का नेचुरल लिपिड बैरियर टूट जाता है, जिससे त्वचा प्रतिक्रिया स्वरूप और ज्यादा तेल बनाने लगती है।
जेल-बेस्ड मॉइस्चराइजर और हयालूरोनिक एसिड का सही इस्तेमाल
कई लोग यह मान बैठते हैं कि बरसात में हवा में पहले से नमी है और चेहरा चिपचिपा रहता है, इसलिए मॉइस्चराइजर की कोई आवश्यकता नहीं है। यह स्किनकेयर से जुड़ी सबसे बड़ी और हानिकारक भ्रांति है। ऑयली स्किन और डिहाइड्रेटेड स्किन में बहुत बड़ा अंतर होता है। जब आप मॉइस्चराइजर छोड़ देते हैं, तो त्वचा अंदर से डिहाइड्रेट हो जाती है और खुद को बचाने के लिए और ज्यादा सीबम रिलीज करती है। बरसात के मौसम में भारी, तेल-आधारित क्रीम्स को छोड़कर वाटर-बेस्ड या ऑयल-फ्री जेल मॉइस्चराइजर का उपयोग करें। हयालूरोनिक एसिड, एलोवेरा और नियासिनामाइड युक्त हल्के फॉर्मूले त्वचा को बिना किसी भारीपन या चिपचिपाहट के भीतर तक नमी प्रदान करते हैं और सीबम प्रोडक्शन को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
बादलों के पीछे छिपी हानिकारक यूवी किरणों से सनस्क्रीन द्वारा सुरक्षा
बारिश के दिनों में आसमान में घने काले बादल छाए रहने पर लोग अक्सर सनस्क्रीन लगाना बंद कर देते हैं। वास्तव में, बादलों की मोटी परत केवल धूप की गर्मी को रोकती है, लेकिन 80 प्रतिशत तक अल्ट्रावायलेट-ए (यूवीए) और अल्ट्रावायलेट-बी (यूवीबी) किरणें बादलों और बारिश को चीरकर सीधे त्वचा तक पहुंचती हैं। ये किरणें त्वचा पर समय से पहले झुर्रियां, पिगमेंटेशन और काले धब्बे पैदा करती हैं। इसलिए, चाहे बाहर तेज बारिश हो रही हो या आप घर के भीतर हों, ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एसपीएफ 30 या 50 वाला नॉन-कॉमेडोजेनिक (जो रोमछिद्र बंद न करे) जेल या मैट-फिनिश सनस्क्रीन लगाना बिल्कुल न छोड़ें। मैटिफाइंग सनस्क्रीन चेहरे पर पसीने की चमक को कम करता है और त्वचा को दिनभर फ्रेश बनाए रखता है।
मुल्तानी मिट्टी और चंदन का होममेड डिटॉक्स पैक
हफ्ते में एक या दो बार त्वचा की डीप क्लींजिंग और अतिरिक्त तेल सोखने के लिए प्राकृतिक फेस पैक का उपयोग सबसे सुरक्षित माना जाता है। केमिकल युक्त पील-ऑफ मास्क से बचने के लिए आप घर पर ही एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, आधा चम्मच शुद्ध चंदन पाउडर, चुटकी भर हल्दी और आवश्यकतानुसार गुलाब जल मिलाकर एक चिकना पेस्ट तैयार कर सकते हैं। मुल्तानी मिट्टी त्वचा के अतिरिक्त तेल को स्पंज की तरह सोख लेती है, जबकि चंदन और गुलाब जल बारिश की उमस के कारण होने वाली लालिमा, खुजली और जलन को तुरंत शांत करते हैं। इस पैक को चेहरे पर लगाएं और 10 से 15 मिनट बाद, जब यह 80 प्रतिशत सूख जाए, हल्के हाथों से सादे ठंडे पानी से धो लें। पैक को पूरी तरह सूखने न दें, ताकि त्वचा की प्राकृतिक इलास्टिसिटी पर खिंचाव न आए।
खानपान, साफ-सफाई और फंगल इन्फेक्शन से बचाव के जरूरी नियम
बारिश के मौसम में बाहरी स्किनकेयर के साथ-साथ आंतरिक स्वास्थ्य और हाइजीन का ध्यान रखना भी उतना ही अनिवार्य है। बरसात में तला-भुना, स्ट्रीट फूड और अत्यधिक मसालेदार भोजन खाने से पाचन तंत्र सुस्त पड़ जाता है, जिसका सीधा असर चेहरे पर फुंसियों के रूप में दिखाई देता है। अपने आहार में मौसमी फल, नींबू पानी, नारियल पानी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी शामिल करें ताकि शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते रहें। अपने चेहरे को बार-बार गंदे हाथों से छूने से बचें, अपने तौलिए और तकिए के कवर को हफ्ते में दो बार गर्म पानी में धोएं, और बारिश के गंदे पानी के संपर्क में आने पर तुरंत चेहरे और पैरों को एंटीबैक्टीरियल साबुन से अच्छी तरह धोकर सुखाएं।