दिल्ली के बंग भवन में आज TMC के 20 बागी सांसदों के साथ बैठक करेंगे शुभेंदु अधिकारी, संसद के नए सियासी समीकरणों पर टिकी नजरें

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन छोड़कर हाल ही में 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी आफ इंडिया' (NCPI) का हिस्सा बनने वाले 20 बागी सांसदों के साथ मंगलवार को दिल्ली के बंग भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अगुवाई खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी करने वाले हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी की पार्टी के टिकट पर संसद में पहुंचने वाले इन सांसदों द्वारा पाला बदले जाने के बाद से ही बंगाल की राजनीति में उबाल आया हुआ है, और एनडीए खेमे में नए सियासी समीकरणों के लिहाज से इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।
लोकसभा स्पीकर के फैसले से पहले सियासी खींचतान
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले इन 20 सांसदों ने बाद में बगावत करते हुए पाला बदल लिया था और अब यह नया दल केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बन चुका है। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अभी तक इस नए राजनीतिक दल-बदल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है, जिसके कारण ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। टीएमसी नेतृत्व ने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक इस पूरी प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष इन सभी बागी सांसदों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की पुरजोर मांग उठाई है, लेकिन लोकसभा सचिवालय की तरफ से अभी तक कोई भी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
सांसद निधि और संसद के आगामी सत्र की रणनीति पर होगी चर्चा
मंगलवार दोपहर को होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से सांसद निधि के फंड के सही और प्रभावी इस्तेमाल, राज्य और केंद्र के बीच प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने तथा आगामी संसद सत्र के दौरान सदन में उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बागी गुट से जुड़ीं बीरभूम की सांसद शताब्दी राय ने इस अहम बैठक की पुष्टि कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे संसद की कार्रवाई आगे बढ़ेगी, इन बागी सांसदों की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर विपक्षी दलों की भी पैनी नजर बनी रहेगी, जिससे यह बैठक एनडीए कुनबे के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।