बड़े आर्थिक सुधारों की तैयारी में केंद्र सरकार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सभी विभागों के सचिवों के साथ करेंगे हाई-लेवल बैठक

पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और वैश्विक उथल-पुथल के प्रभाव से भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखने के साथ-साथ 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े नीतिगत सुधारों की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी प्रमुख विभागों के सचिवों की एक अहम और उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस महाबैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सचिव रिफॉर्म्स को लेकर अपने विशेष प्रस्तुतिकरण देंगे, जिनके आधार पर देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए अगले चरण की रणनीति तय की जाएगी।
फरवरी के युद्ध संकट के बाद गठित किए गए थे विशेष समूह
गौरतलब है कि फरवरी के आखिरी दौर में ईरान-अमेरिका संघर्ष की शुरुआत होने के बाद कैबिनेट सचिव ने विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों की अध्यक्षता में सात विशेष समूहों का गठन किया था। इन समूहों ने गहन मंथन के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कैबिनेट सचिव को सौंप दी थी, जिसे अब मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इन सभी समूहों के गठन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, महंगाई नियंत्रण, आयात-निर्यात और रक्षा निर्माण जैसे संवेदनशील विषयों पर विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय को और अधिक मजबूत करना है।
सचिवों को सौंपे गए थे तीन अहम टास्क और एजेंडा
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में शामिल होने वाले सभी सचिवों को पहले ही तीन मुख्य टास्क दिए गए थे, जो आज की बैठक का प्रमुख एजेंडा रहने वाले हैं। पहले टास्क के तहत सचिवों को यह बताना है कि उनके विभागों को लक्ष्य प्राप्ति में किन व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। दूसरे टास्क में उन्हें अपनी पारंपरिक परिधि से बाहर निकलकर लीक से हटकर काम करने के सुझाव देने हैं, जबकि तीसरे टास्क के तहत हर सचिव को अपने विभाग के अलावा अन्य विभागों के सुधारों के लिए भी नवीन विचार और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
अलग-अलग क्षेत्रों के लिए दिग्गजों के नेतृत्व में बने हैं समूह
विभिन्न क्षेत्रों की कमान संभालने वाले इन समूहों में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर के नेतृत्व में 11 सदस्यीय मुख्य समूह देश की वृहद अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने, आयात-निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग जैसे अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री को सुझाव देगा। इसके अलावा, पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के नेतृत्व वाला समूह ऊर्जा और एलपीजी-एलएनजी आपूर्ति पर अपनी बात रखेगा, जबकि विदेश सचिव और रक्षा सचिव के नेतृत्व वाले समूह अपनी रणनीतिक रिपोर्ट पेश करेंगे। शिपिंग सचिव विजय कुमार के नेतृत्व वाला समूह देश के लॉजिस्टिक विकास की रूपरेखा तैयार कर रहा है। सरकार का मुख्य फोकस सप्लाई चेन को बेहतर बनाकर मैन्युफैक्चरिंग लागत को कम करना और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को जमीनी स्तर पर और अधिक सरल बनाना है।