दुनिया भर में मचे आर्थिक संकट के बीच PM ने आर्थिक सलाहकारों संग की हाई-लेवल बैठक

वैश्विक स्तर पर मंडरा रहे आर्थिक संकट (Global Economic Crisis) के बादलों के बीच देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत और सुरक्षित बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री ने देश के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों और नीति निर्माताओं के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की। इस आपातकालीन समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में पैदा हो रहे आर्थिक संकट के खतरों को भांपते हुए भारतीय इकोनॉमी को इसके दुष्प्रभावों से बचाना और विकास की रफ्तार को बरकरार रखना है।
वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश को सुरक्षित रखने पर मंथन
इस हाई-लेवल बैठक में वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं और विभिन्न देशों में देखने को मिल रही मंदी की आहट पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM), नीति आयोग के सदस्यों और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का भारतीय बाजार पर होने वाले संभावित असर का विश्लेषण किया। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थितियां चाहे जितनी भी प्रतिकूल हों, देश के घरेलू बाजारों और आम जनता पर इसका कम से कम असर पड़ना चाहिए।
भारतीय इकोनॉमी की मजबूती के लिए रणनीतिक कदम
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने आर्थिक सलाहकारों को निर्देश दिए कि वे देश के प्रमुख आर्थिक संकेतकों जैसे कि रिटेल इन्फ्लेशन (महंगाई दर), औद्योगिक उत्पादन और विदेशी मुद्रा भंडार पर पैनी नजर रखें। इसके साथ ही, देश में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने, निर्यात के नए रास्ते तलाशने और घरेलू निवेश को तेजी से आकर्षित करने के लिए कई रणनीतिक बिंदुओं पर सहमति बनी है। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि भारत के वित्तीय संस्थानों और बैंकिंग सेक्टर को पूरी तरह से सुरक्षित और लिक्विडिटी से भरपूर रखा जाए ताकि किसी भी बाहरी झटके को आसानी से झेला जा सके।
आम जनता और बाजारों को बड़ी राहत की उम्मीद
इस हाई-लेवल मीटिंग की खबर बाहर आने के बाद से भारतीय शेयर बाजारों और कॉरपोरेट जगत में एक सकारात्मक संदेश गया है। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह सक्रियता दर्शाती है कि सरकार वैश्विक संकट को लेकर बेहद गंभीर है और समय रहते जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार है। इस बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर आने वाले दिनों में वित्त मंत्रालय की तरफ से कुछ बड़े नीतिगत बदलावों और राहत पैकेजों की घोषणा भी की जा सकती है, जिससे न सिर्फ निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा बल्कि आम आदमी को भी महंगाई और मंदी के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।