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लंदन में जुटे 30 से ज्यादा देश, ब्रिटेन संभालेगा कमान दुनिया को तेल संकट से बचाने के लिए तैयार हुआ ब्लूप्रिंट

News India Live, Digital Desk : दुनिया की लाइफलाइन मानी जाने वाली होरमुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए वैश्विक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। लंदन के नॉर्थवुड स्थित ‘परमानेंट जॉइंट हेडक्वार्टर’ में बुधवार (22 अप्रैल 2026) से एक महत्वपूर्ण दो-दिवसीय सैन्य सम्मेलन शुरू हुआ है। ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में हो रही इस बैठक में 30 से अधिक देशों के सैन्य योजनाकार (Military Planners) हिस्सा ले रहे हैं। इस मिशन का एकमात्र लक्ष्य है ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण बंद पड़े इस जलमार्ग को सुरक्षित रूप से फिर से शुरू करना।ब्रिटेन और फ्रांस बनेंगे ‘सुरक्षा कवच’इस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का नेतृत्व ब्रिटेन और फ्रांस कर रहे हैं। ब्रिटिश रक्षा मंत्री जॉन हीली ने स्पष्ट किया है कि यह मिशन पूरी तरह से ‘रक्षात्मक’ होगा। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कूटनीतिक सहमति को एक ठोस सैन्य योजना में बदलना है।रणनीति: गठबंधन की सेनाएं व्यापारिक जहाजों (Merchant Vessels) को सुरक्षा प्रदान करेंगी।माइन क्लीयरेंस: खाड़ी में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाने के लिए विशेष रोबोटिक ड्रोन और युद्धपोत तैनात किए जाएंगे।कमांड और कंट्रोल: लंदन बैठक में यह तय किया जा रहा है कि विभिन्न देशों की सेनाएं एक साथ मिलकर कैसे काम करेंगी।क्यों जरूरी है होरमुज का खुलना?होरमुज की खाड़ी दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है। इसके बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है:महंगाई का खतरा: कच्चे तेल की सप्लाई रुकने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं।खाद्य असुरक्षा: विश्व बैंक के अनुसार, इस संकट के कारण दुनिया भर में करीब 90 लाख लोग खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं।फंसे हुए जहाज: हजारों जहाज और नाविक वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता है।ट्रंप का रुख और ईरान की चेतावनीदिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक तरफ 30 देश लंदन में समाधान ढूंढ रहे हैं, वहीं अमेरिका और ईरान इस बैठक का हिस्सा नहीं हैं।डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में ईरान के साथ युद्धविराम (Ceasefire) को बढ़ा दिया है, लेकिन वे अब भी ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी बनाए हुए हैं।ईरान: तेहरान ने इस बैठक को ‘संदेह’ की नजर से देखा है। ईरानी सलाहकारों का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक किसी भी मिशन का कोई मतलब नहीं है।भारत के लिए क्या है इसके मायने?भारत इस बैठक पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा सीधे तौर पर इस जलमार्ग से जुड़ी है। यदि ब्रिटेन के नेतृत्व वाला यह मिशन सफल होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।

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