धनतेरस पर लाए नए बर्तन और शुभ वस्तुओं का क्या करना चाहिए

सनातन धर्म में दिवाली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस (धन्वंतरि जयंती) का पावन पर्व धन, वैभव और आरोग्य की प्राप्ति का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। इस शुभ अवसर पर हर कोई अपनी सामर्थ्य के अनुसार नए बर्तन, झाड़ू, सोने-चांदी के सिक्के, धातु की वस्तुएं और साबुत धनिया खरीदकर अपने घर लाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में 13 गुना समृद्धि और खुशहाली लाती हैं। हालांकि, अक्सर लोग बाजार से इन शुभ चीजों को घर लाने के बाद इन्हें सीधे अलमारी या रसोई में रख देते हैं, जो कि वास्तु और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सही नहीं है। प्रसिद्ध पंडितों और वास्तु आचार्यों के अनुसार, धनतेरस पर खरीदी गई हर एक वस्तु को इस्तेमाल करने और पूजा में शामिल करने के कुछ विशेष शास्त्र सम्मत नियम होते हैं, जिनका पालन करने पर ही मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की असीम कृपा प्राप्त होती है।
#1. धनतेरस पर लाए नए बर्तनों का क्या करें? भूलकर भी खाली बर्तन न रखें घर के अंदर
धनतेरस के दिन पीतल, तांबे या चांदी के नए बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। यदि आप भी इस दिन नए बर्तन खरीदकर घर ला रहे हैं, तो सबसे पहला नियम यह है कि इन्हें घर के भीतर कभी भी खाली (खाली पेट) न लाएं। खाली बर्तन नकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं। बाजार से लाते समय या घर के मुख्य द्वार से प्रवेश करते वक्त इन बर्तनों में थोड़ा सा अक्षत (चावल), पानी, दूध, गुड़ या कोई भी मीठी चीज अवश्य भर लें। इसके बाद बर्तनों को शुद्ध पानी से धोकर गंगाजल से पवित्र करें। दिवाली पूजन की रात इन नए बर्तनों को लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा के समक्ष रखें और उसमें भोग अर्पित करें। इसके बाद ही इन बर्तनों का दैनिक रसोई में इस्तेमाल शुरू करना चाहिए, ऐसा करने से अन्नपूर्णा देवी का वास बना रहता है।
#1. नई झाड़ू लाने के बाद क्या करें? जानिए इसे छिपाकर रखने और पुरानी झाड़ू हटाने का नियम
धनतेरस पर झाड़ू खरीदना मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सबसे अचूक उपाय माना जाता है, क्योंकि झाड़ू को दरिद्रता दूर करने और समृद्धि लाने का प्रतीक माना गया है। नई झाड़ू घर लाने के बाद उसे सीधे इस्तेमाल में न लाएं। सबसे पहले उस पर सफेद रंग का धागा या कलावा बांधें और थोड़ा सा कुमकुम-अक्षत लगाकर पूजा करें। झाड़ू को घर में ऐसी जगह रखें जहां बाहरी लोगों की सीधी नजर उस पर न पड़े। धनतेरस की रात और दिवाली के दिन नई झाड़ू से घर की सफाई करना अत्यंत शुभ होता है। ध्यान रखें कि पुरानी झाड़ू को दिवाली पूजन से पहले घर से बाहर न निकालें; दिवाली पूजा के अगले दिन ही पुरानी झाड़ू को आदरपूर्वक किसी सुनसान स्थान पर फेंकना चाहिए।
#1. चांदी के सिक्के और पीतल के सामान का पूजा में इस्तेमाल और तिजोरी के नियम
धनतेरस के दिन खरीदे गए सोने या चांदी के सिक्कों को सीधे अलमारी में बंद करके नहीं रखना चाहिए। दीपावली की मुख्य पूजा के दौरान इन सिक्कों को पंचामृत से स्नान कराकर, गंगाजल से शुद्ध करके लक्ष्मी-गणेश जी के चरणों में अर्पित करें। उन पर रोली, अक्षत और कलावा चढ़ाकर विधिवत आरती करें। दिवाली पूजा संपन्न होने के बाद, इन सिद्ध सिक्कों को लाल या पीले रेशमी कपड़े में बांधकर अपने घर की तिजोरी या धन स्थान पर रख दें। ऐसा करने से पूरे वर्ष धन की आवक बनी रहती है और अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगती है। इसी प्रकार पीतल और तांबे के बर्तनों का प्रयोग भगवान को भोग लगाने या जल अर्पित करने के लिए करना सबसे उत्तम माना गया है।
#1. साबुत धनिया का क्या करें? जानें बोने और तिजोरी में रखने की चमत्कारी विधि
धनतेरस पर खरीदा गया साबुत धनिया धन वृद्धि का सबसे बड़ा सूचक माना जाता है। दिवाली की रात महालक्ष्मी पूजन के समय एक कटोरी में साबुत धनिया रखकर उस पर थोड़ा सा गुड़ और चांदी का सिक्का रखें। पूजा समाप्त होने के बाद, अगले दिन (गोवर्धन पूजा या भैया दूज के दिन) इस धनिए में से थोड़ा सा हिस्सा अपने घर के बगीचे या किसी गमले में बो दें। यदि इससे हरा-भरा और स्वस्थ पौधा उगता है, तो यह संकेत देता है कि आने वाले वर्ष में आपके घर में आर्थिक स्थिरता और समृद्धि आएगी। बचे हुए साबुत धनिए को एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें। यह प्रयोग आपके घर में बरकत बनाए रखता है और वास्तु दोषों का शमन करता है।