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धरी रह गई पाकिस्तान की तैयारी, अमेरिका और ईरान ने दिया बड़ा झटका; पीएम शहबाज शरीफ का स्विट्जरलैंड दौरा अचानक रद्द

अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (Peace Deal) के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने के लिए अपना प्रस्तावित स्विट्जरलैंड दौरा अचानक स्थगित कर दिया है। इस दौरे के रद्द होने की मुख्य वजह यह है कि दोनों महाशक्तियों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर पहले ही डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षर किए जा चुके हैं और यह महाडील तत्काल प्रभाव से धरातल पर लागू भी हो गई है। पाकिस्तान इस पूरे मामले में कतर के साथ मिलकर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था और बड़े स्तर पर जश्न की तैयारी में जुटा था।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इस कूटनीतिक बदलाव की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि स्विट्जरलैंड के आलीशान बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में शुक्रवार को होने वाला भव्य हस्ताक्षर समारोह अब अप्रासंगिक हो गया है, क्योंकि दोनों देशों ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से दस्तावेज़ों को फाइनल कर दिया है।

डिजिटल हस्ताक्षर के साथ तत्काल प्रभाव से लागू हुई महाडील, शहबाज शरीफ ने हटाया अपना सोशल मीडिया पोस्ट

इस कूटनीतिक हलचल से कुछ घंटे पहले खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए पूरी दुनिया को इस समझौते के लागू होने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि इस ऐतिहासिक समझौते के पहले चरण के तहत ईरान बिना किसी देरी के तुरंत 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोल देगा, जबकि इसके बदले में अमेरिका ईरान के खिलाफ की गई अपनी सख्त नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को तत्काल प्रभाव से हटा लेगा।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सस्पेंस तब गहरा गया जब शहबाज शरीफ ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में संशोधन करते हुए उस पैराग्राफ को ही हटा दिया, जिसमें उन्होंने लिखा था कि पाकिस्तान और सह-मध्यस्थ कतर के विशेष सहयोग से 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक बड़ा आधिकारिक समारोह आयोजित होने जा रहा है। इसके तुरंत बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने बीबीसी उर्दू से बातचीत में साफ किया कि रिमोट मीडिया (डिजिटल माध्यम) से हस्ताक्षर होने के कारण अब स्विट्जरलैंड का भौतिक समारोह पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों संजीवनी है होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना?

रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कुल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस साल फरवरी के अंत में हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में युद्ध के बादल मंडराने लगे थे, जिसके जवाब में ईरान ने मार्च की शुरुआत में इस पूरे जलमार्ग की नाकाबंदी कर वैश्विक तेल व्यापार को ठप कर दिया था। इसके पलटवार में अमेरिका ने अप्रैल में ईरान के खिलाफ चौतरफा नौसैनिक नाकाबंदी लागू की थी, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।

पाकिस्तान और कतर ने निभाई पर्दे के पीछे बड़ी भूमिका, वैश्विक ऊर्जा बाजार को मिलेगी राहत

भले ही स्विट्जरलैंड में होने वाला भव्य समारोह रद्द हो गया हो, लेकिन इस पूरे समझौते को अमलीजामा पहनाने में पाकिस्तान और कतर ने पर्दे के पीछे बेहद महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। इन दोनों देशों के लगातार प्रयासों के कारण ही अमेरिका और ईरान के कड़े तेवर ढीले पड़े और दोनों देश अंततः मेज पर आकर तनाव कम करने तथा समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में राजी हुए। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में स्थिरता आएगी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे भारत सहित दुनिया के तमाम विकासशील देशों को बड़ी राहत मिलेगी।

 

 

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