“नर्सों की यूनिफॉर्म में आज भी है ब्रिटिश गुलामी की झलक,” कंगना रनौत ने ड्रेस कोड पर उठाए बड़े सवाल, देश के सामने रखी यह अनोखी मांग

अपनी बेबाक बयानबाजी और लीक से हटकर सोचने के लिए मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने एक नए बयान को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं। इस बार कंगना ने देश के मेडिकल सिस्टम, खासकर नर्सों के पहनावे और उनके पारंपरिक ड्रेस कोड को लेकर एक बड़ा और बहस छेड़ देने वाला बयान दिया है। कंगना रनौत का मानना है कि भारत में आज भी नर्सें जो यूनिफॉर्म पहनती हैं, उस पर ब्रिटिश शासन और पश्चिमी सभ्यता का गहरा प्रभाव है। उन्होंने देश में एक सकारात्मक बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब नर्सों के इस दशकों पुराने पहनावे को बदलकर इसे एक गरिमामयी 'भारतीय लुक' दिया जाना चाहिए।
अपकमिंग फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' में नर्स का किरदार निभा रही हैं कंगना
दरअसल, कंगना रनौत इन दिनों अपनी आने वाली बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। इस फिल्म में वे मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जहां उन्होंने पर्दे पर एक जांबाज नर्स का बेहद संजीदा किरदार जिया है। इसी फिल्म के प्रमोशन और मीडिया इंटरव्यू के दौरान जब कंगना से उनके लुक और अनुभव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने ऑन-स्क्रीन यूनिफॉर्म पहनने के अपने अनुभव को साझा करते हुए देश की वास्तविक नर्सों के ड्रेस कोड पर अपनी राय रखी। कंगना ने कहा कि जहां डॉक्टरों के कपड़े समय के साथ काफी फ्लेक्सिबल, आरामदायक और आधुनिक हो चुके हैं, वहीं नर्सों को आज भी उसी पारंपरिक और पुराने ढर्रे के वेस्टर्न स्टाइल को ढोने के लिए मजबूर किया जाता है।
यूएस नेवी और वर्ल्ड वॉर के दौर से प्रभावित है मौजूदा लुक
समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में कंगना रनौत ने इस यूनिफॉर्म के इतिहास और इसके पीछे के पश्चिमी प्रभाव को विस्तार से समझाया। कंगना ने तर्क देते हुए कहा कि हमारी नर्सों की यूनिफॉर्म में जो पिन लगाना, सिर पर कैप (टोपी) सजाना या कमर के ऊपर बेल्ट बांधना शामिल है, यह सब असल में अमेरिकी नौसेना (US Navy) के पहनावे से प्रभावित है। इस तरह का लुक मुख्य रूप से प्रथम विश्व युद्ध (World War I) और द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान पश्चिमी देशों की मेडिकल विंग में देखा जाता था। कंगना ने सवाल उठाया कि चाहे देश में कड़ाके की ठंड हो या झुलसा देने वाली गर्मी, हमारी नर्सों को आज भी उसी विदेशी और ब्रिटिश लुक को कैरी करना पड़ता है, जो अब अप्रासंगिक हो चुका है।
"यूनिफॉर्म आपकी ड्यूटी है, लेकिन इसमें भारतीयता का तड़का जरूरी"
कंगना ने साफ किया कि यह उनका पूरी तरह से व्यक्तिगत दृष्टिकोण (Personal Opinion) है, लेकिन वे चाहती हैं कि भविष्य में इसमें कुछ बदलाव किए जाएं। उन्होंने कहा, ‘मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि इस ड्रेस कोड को रीडिजाइन किया जाना चाहिए और इसे थोड़ा इंडियन लुक दिया जाना चाहिए, जो कि एक बहुत ही सकारात्मक और सुंदर बदलाव होगा।’ इसके साथ ही उन्होंने अपनी फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि हमने फिल्म में नर्सों के काम को बेहद ईमानदारी और गरिमा के साथ पर्दे पर उतारा है। इंसान का शेप और साइज चाहे जो भी हो, उसकी यूनिफॉर्म उसकी ड्यूटी और जिम्मेदारी का प्रतीक होती है, और इस पेशे के प्रति हमारे दिल में अगाध सम्मान है।
26/11 के मुंबई आतंकी हमले की सच्ची घटना पर आधारित है फिल्म
अगर बात करें कंगना रनौत की फिल्म 'भारत भाग्य विधाता' की, तो इसकी कहानी साल 2008 में हुए 26/11 के भीषण मुंबई आतंकवादी हमले की एक सच्ची और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना पर आधारित है। फिल्म में उस खौफनाक मंजर को दर्शाया गया है जब अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकवादी मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अंधाधुंध फायरिंग करते हुए घुस जाते हैं। उस मौत के साए के बीच, अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ मेंबर्स ने अपनी जान की परवाह न करते हुए सूझबूझ दिखाई और आतंकियों के सामने ढाल बनकर खड़े हो गए। इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे इन रियल-लाइफ हीरोज ने मिलकर अस्पताल के भीतर फंसे करीब 400 मासूम मरीजों की जान को सुरक्षित बचाया था।