उत्तर प्रदेश

नोएडा के सोरखा में दर्दनाक हादसा: टावर से गिरकर मजदूर की मौत से मचा हड़कंप

देशभर में तेजी से हो रहे शहरीकरण और ऊंची-ऊंची इमारतों के निर्माण का यह दौर जितना आधुनिक और भव्य दिखाई देता है, उसकी असली कीमत अक्सर वे मजदूर चुकाते हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर इन ईंट-पत्थर की इमारतों को खड़ा करते हैं। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर नोएडा से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने एक बार फिर से निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और सुरक्षा मानकों के पालन पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोएडा के थाना फेज-3 क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सोरखा गांव के पास एक निर्माणाधीन आवासीय सोसाइटी की ऊंची इमारत पर काम कर रहा एक गरीब मजदूर अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण नीचे आ गिरा। इस भयावह हादसे में मजदूर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद से पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, लेकिन इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कागजी दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर मजदूरों की जिंदगी कितनी असुरक्षित है।

कैसे हुआ यह भयानक हादसा और क्या कहती है शुरुआती पुलिस जांच की रिपोर्ट?

प्राप्त जानकारी और स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मिली शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, सोरखा गांव के समीप स्थित इस निर्माणाधीन ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की साइट पर इन दिनों तेजी से निर्माण कार्य चल रहा था। मृतक मजदूर रोज की तरह अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए सुबह टावर पर काम करने के लिए चढ़ा था। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, काम के दौरान सुरक्षा के लिए जरूरी बेल्ट, हार्नेस या सेफ्टी नेट जैसी बुनियादी चीजों का अभाव था, जिसके कारण ऊंचाई पर काम करते समय अचानक पैर फिसलने से वह नीचे आ गिरा। इतनी ऊंचाई से जमीन पर गिरने के कारण उसके शरीर और सिर पर गंभीर चोटें आईं। आसपास काम कर रहे अन्य सहकर्मी तुरंत दौड़कर उसके पास पहुंचे और आनन-फानन में उसे नजदीकी अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना की खबर मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने ठेकेदार और निर्माण कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या साइट पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही थी।

निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी: क्यों हर बार दांव पर लगती है मजदूरों की जान?

यह कोई पहला मौका नहीं है जब नोएडा या एनसीआर के किसी निर्माण स्थल पर सुरक्षा में लापरवाही के कारण किसी गरीब मजदूर को अपनी जान गंवानी पड़ी हो। देश के बड़े शहरों में जब भी किसी रेजिडेंशियल या कमर्शियल प्रोजेक्ट का निर्माण होता है, तो लेबर लॉ और बिल्डिंग बायलॉज के तहत यह सख्त निर्देश दिए जाते हैं कि ऊंचाई पर काम करने वाले हर श्रमिक को हेलमेट, सेफ्टी जैकेट, फुल-बॉडी हार्नेस बेल्ट और मजबूत मचान (स्कैफोल्डिंग) की सुविधा दी जाए। इसके साथ ही टावर के चारों तरफ सुरक्षा जाल लगाना अनिवार्य होता है ताकि यदि कोई दुर्घटना हो भी, तो मजदूर सीधे नीचे न गिरे। लेकिन मुनाफा कमाने की होड़ में अक्सर बिल्डर्स, ठेकेदार और साइट मैनेजर इन जरूरी सुरक्षा उपकरणों पर होने वाले खर्च को बचा लेते हैं। मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के ही कई-कई मंजिला ऊंची इमारतों के खुले किनारों पर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। गरीबी और लाचारी के कारण ये मजदूर भी चुपचाप जोखिम उठाकर काम करने को विवश होते हैं, और जब ऐसे हादसे होते हैं तो कुछ दिनों की बयानबाजी के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।

प्रशासन की सख्ती और न्याय की उम्मीद: पीड़ित परिवार को कब मिलेगा मुआवजा और इंसाफ?

सोरखा की इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय निवासियों, श्रमिक संघों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक लापरवाह बिल्डर्स और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त से सख्त आपराधिक मुकदमे दर्ज करके उन्हें सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगना नामुमकिन है। पुलिस और श्रम विभाग (Labour Department) की टीम अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि क्या उस निर्माणाधीन सोसाइटी के पास सभी वैध अनुमतियां थीं और क्या साइट पर लेबर कमिश्नर के नियमों का पालन किया जा रहा था। यदि जांच में बिल्डर या ठेकेदार की तरफ से किसी भी प्रकार की लापरवाही या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, जिला प्रशासन और सामाजिक संगठनों से यह मांग की जा रही है कि मृतक के गरीब परिवार को तुरंत उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए ताकि इस दुख की घड़ी में उनके भरण-पोषण का कुछ सहारा बन सके। यह हादसा हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि विकास की इन चमकती हुई इमारतों के पीछे पसीना बहाने वाले इन इंसानों की सुरक्षा से समझौता करना बंद होना चाहिए।

Back to top button