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न्यायपालिका में लालच पर जस्टिस नागरत्ना का प्रहार, बोलीं-भ्रष्ट जजों को सिस्टम से उखाड़ फेंकना जरूरी

News India Live, Digital Desk: देश की सर्वोच्च अदालत की वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने न्यायपालिका के भीतर पनप रहे भ्रष्टाचार और लालच पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि ‘लालची जजों’ के लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं होनी चाहिए और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना अनिवार्य है। जस्टिस नागरत्ना का यह बयान ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका की विश्वसनीयता को लेकर सार्वजनिक मंचों पर बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने साफ किया कि एक जज का आचरण संदेह से परे होना चाहिए।न्याय की कुर्सी पर ‘लालच’ बर्दाश्त नहींजस्टिस नागरत्ना ने अपने संबोधन में जजों की नैतिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि न्याय की कुर्सी पर बैठने वाला व्यक्ति अगर लालच के वशीभूत हो जाए, तो वह न केवल संविधान के साथ धोखा है बल्कि आम जनता के भरोसे का कत्ल भी है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अगर सिस्टम के भीतर कुछ लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए काम करेंगे, तो न्यायपालिका की पूरी साख गिर जाएगी। उनका इशारा साफ था—जो जज निष्पक्ष नहीं रह सकते, उन्हें न्यायिक सेवा में रहने का कोई अधिकार नहीं है।जजों की नियुक्ति और आचरण पर उठे सवालसुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश ने जजों के चयन और उनकी निगरानी की प्रक्रिया पर भी बात की। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के भीतर एक ऐसी ‘छंटनी प्रक्रिया’ होनी चाहिए जिससे भ्रष्ट मानसिकता वाले लोगों को समय रहते बाहर किया जा सके। जस्टिस नागरत्ना के अनुसार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तभी सुरक्षित रह सकती है जब इसके भीतर काम करने वाले लोग अपनी सत्यनिष्ठा (Integrity) को सर्वोपरि रखें। उन्होंने युवा जजों को भी नसीहत दी कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन से दूर रहें।आम आदमी के भरोसे को बचाना सबसे बड़ी चुनौतीजस्टिस नागरत्ना ने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां लोग न्याय के लिए आखिरी उम्मीद के तौर पर अदालतों की ओर देखते हैं, वहां जजों का भ्रष्ट होना लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायिक अधिकारियों का जीवन खुली किताब की तरह होना चाहिए। यदि किसी जज की ईमानदारी पर दाग लगता है, तो उसका असर केवल एक केस पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच पर पड़ता है। इसलिए, सिस्टम की ‘सफाई’ करना अब वक्त की जरूरत बन गई है।सोशल मीडिया और सार्वजनिक आचरण पर नसीहतभाषण के दौरान उन्होंने जजों के सार्वजनिक आचरण और सोशल मीडिया के दौर में उनकी संजीदगी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जजों को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और ऐसी किसी भी गतिविधि से बचना चाहिए जिससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों। जस्टिस नागरत्ना का यह ‘क्लीन अप’ कॉल न्यायिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे चुका है, जिसे आने वाले समय में बड़े सुधारों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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