विदेश

पाकिस्तान को कंपाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल से यूक्रेन में तबाही मचाएंगे पुतिन? रूस की सेना में शामिल हो सकता

अंतरराष्ट्रीय डिफेंस और जियोपॉलिटिक्स के गलियारों से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के साथ-साथ विशेष रूप से पश्चिमी देशों और नाटो (NATO) खेमे में खलबली मचा दी है। सैन्य विशेषज्ञों और खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन युद्ध को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से बनी दुनिया की सबसे खतरनाक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' (BrahMos Missile) को अपनी सेना में शामिल करने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहे हैं। यह वही महाविनाशक मिसाइल है जिसकी रफ्तार और अचूक मारक क्षमता के खौफ से पड़ोसी देश पाकिस्तान हमेशा कांपता रहता है। अगर यह रक्षा सौदा हकीकत में बदलता है, तो यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में रूस की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस क्यों है पुतिन की पहली पसंद

यूक्रेन के साथ लंबे समय से चल रहे युद्ध के कारण रूस को अपने मिसाइल स्टॉक को लगातार रीबैलेंस और अपग्रेड करने की जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में भारत की ब्रह्मोस मिसाइल पुतिन की सेना के लिए सबसे सटीक और अचूक हथियार साबित हो सकती है। ध्वनि की गति से करीब तीन गुना तेजी (2.8 मैक) से उड़ान भरने वाली यह मिसाइल दुनिया के किसी भी आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को पलक झपकते ही चकमा देने में पूरी तरह सक्षम है। युद्धनीति के जानकारों का कहना है कि रूस अपनी मारक क्षमता को और अधिक आक्रामक बनाने के लिए इस मिसाइल के उस वर्जन को हासिल करना चाहता है, जिसे सुखोई लड़ाकू विमानों और नौसैनिक युद्धपोतों से आसानी से दागा जा सके।

जिस मिसाइल की दहाड़ से पाकिस्तान के छूटे पसीने, उसकी ताकत से डरा पूरा पश्चिम

आपको याद होगा कि कुछ समय पहले जब भारत की एक ब्रह्मोस मिसाइल तकनीकी खराबी के कारण गलती से पाकिस्तान की सीमा के भीतर जा गिरी थी, तब पाकिस्तानी सेना और वहां का रडार सिस्टम उसे ट्रैक करने में पूरी तरह नाकाम रहा था। इस घटना ने दुनिया भर में ब्रह्मोस की ताकत का लोहा मनवाया था। अब इसी अचूक और घातक मिसाइल के यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल होने की संभावनाओं ने अमेरिका और यूरोपीय देशों की रातों की नींद उड़ा दी है। पश्चिमी रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि रूसी सेना ने यूक्रेन के महत्वपूर्ण ठिकानों और कमांड सेंटरों पर ब्रह्मोस से हमले शुरू किए, तो यूक्रेन को दी गई अरबों डॉलर की पश्चिमी वायु रक्षा प्रणालियां (जैसे पैट्रियट मिसाइल सिस्टम) भी इसे रोकने में बेअसर साबित हो सकती हैं।

भारत के रुख और अंतरराष्ट्रीय रक्षा नियमों पर टिकी दुनिया की नजरें

रूसी सेना द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की खबरों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल भारत के स्टैंड को लेकर खड़ा हो गया है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है, जिसे दोनों देशों ने मिलकर विकसित किया है। हालांकि रूस इसका सह-निर्माता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों और मौजूदा भू-राजनीतिक समीकरणों के तहत इसके किसी तीसरे देश या युद्ध क्षेत्र में सीधे इस्तेमाल को लेकर भारत की सहमति बेहद अनिवार्य होगी। भारत हमेशा से ही यूक्रेन विवाद को बातचीत और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का पक्षधर रहा है। ऐसे में वैश्विक मंच पर भारत इस पूरे मामले को किस तरह संभालता है और पुतिन के इस संभावित अनुरोध पर क्या फैसला लेता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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