न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री ने क्यों कहा भारत के साथ यह समझौता बेईमानी है? जानिये पूरा सच

News India Live, Digital Desk: अक्सर हम सुनते हैं कि भारत दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ व्यापार को बढ़ाने के लिए ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) कर रहा है। ये समझौते दोस्ती और मुनाफे के लिए होते हैं। लेकिन न्यूजीलैंड के साथ चल रही बातचीत में अब एक नया और तीखा मोड़ आ गया है। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री, विंस्टन पीटर्स, जो अपनी बेबाक और सख्त टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया है कि भारत के साथ प्रस्तावित यह समझौता “न तो मुक्त है और न ही निष्पक्ष” (Neither Free Nor Fair)।अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर दो दोस्तों के बीच बात इतनी बिगड़ी क्यों? चलिए, आसान भाषा में समझते हैं।दिक्कत कहां है? जवाब है- ‘दूध’इस पूरे विवाद की जड़ में ‘दूध’ है। हम सब जानते हैं कि न्यूजीलैंड दुनिया भर में अपने दूध, मक्खन और पनीर (Dairy Products) के लिए मशहूर है। उनकी पूरी इकॉनमी काफी हद तक इसी पर टिकी है। विंस्टन पीटर्स का कहना है कि अगर कोई समझौता हो रहा है और उसमें न्यूजीलैंड को भारत के विशाल डेयरी बाजार में अपना माल बेचने की खुली छूट नहीं मिलती, तो फिर न्यूजीलैंड को इससे क्या फायदा?उन्होंने कहा कि यह समझौता “फ्री” इसलिए नहीं है क्योंकि भारत अभी भी टैक्स और पाबंदियां लगाए हुए है, और “फेयर” इसलिए नहीं है क्योंकि इसमें न्यूजीलैंड को बराबरी का मौका नहीं मिल रहा।भारत की अपनी मजबूरी (और ताकत भी)अब जरा भारत का पक्ष भी देखिये। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, लेकिन यहाँ का दूध कारोबार अमूल, मदर डेयरी और करोड़ों छोटे किसानों से चलता है। भारत सरकार जानती है कि अगर न्यूजीलैंड का मशीनों से बना सस्ता दूध और पाउडर बिना टैक्स के भारत में आ गया, तो हमारे गांव के किसानों की रोजी-रोटी खत्म हो जाएगी।यही वजह है कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने डेयरी सेक्टर को खतरे में नहीं डाल सकता, चाहे इसके लिए FTA रुके या चले। भारत की यही मजबूती विंस्टन पीटर्स को चुभ रही है।कूटनीति या घरेलू राजनीति?मजेदार बात यह है कि विंस्टन पीटर्स अपनी ही सरकार (गठबंधन सरकार) का हिस्सा हैं। जानकारों का मानना है कि उनका यह बयान सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि अपने देश के वोटरों (खासकर वहां के किसानों) को खुश करने के लिए है। वे यह जताना चाहते हैं कि वे न्यूजीलैंड के हितों के साथ समझौता नहीं करेंगे, भले ही सामने भारत जैसा शक्तिशाली देश हो।आगे क्या होगा?फ़िलहाल तो ऐसा लग रहा है कि दोनों देशों के बीच पेंच फंसा हुआ है। भारत अपने सर्विस सेक्टर (IT और प्रोफेशनल्स) के लिए न्यूजीलैंड में आसान एंट्री चाहता है, जबकि न्यूजीलैंड अपने दूध और सेब बेचना चाहता है। विंस्टन पीटर्स के इस तल्ख बयान के बाद बातचीत की मेज पर माहौल थोड़ा गर्म जरूर होगा।यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अपने किसानों को बचाते हुए न्यूजीलैंड को मनाने में कामयाब होता है, या फिर यह डील ठंडे बस्ते में चली जाएगी।