पैरों की नीली नसें और मकड़ी जैसा जाल नहीं है मामूली बात: शरीर के अंदर पनप रही इस गंभीर बीमारी का है बड़ा संकेत

अक्सर लोगों का ध्यान पैरों या जांघों पर उभरने वाली नीली नसों पर नहीं जाता है और वे इसे महज एक मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, त्वचा पर असामान्य रूप से दिखने वाली ये नीली नसें शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर साफ इशारा करती हैं। समय रहते यदि इनका उचित उपचार न किया जाए, तो यह स्थिति पैरों में काले निशान, एक्जिमा और बड़े-बड़े दर्दनाक घावों का रूप ले सकती है।
क्यों दिखाई देती हैं पैरों पर उभरी हुई नीली नसें?
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैस्कुलर एवं कार्डियोथोरेसिस सर्जन डॉ. के.के. पांडेय के अनुसार, पैरों और जांघों की ऊपरी सतह पर दिखने वाली नीली नसें दरअसल वेंस का एक जाल होती हैं, जो टांगों के अंदर स्थित मोटी और बड़ी शिराओं के सिस्टम से जुड़ी होती हैं।
सामान्य स्थिति में ऊपरी सतह की नसें अशुद्ध खून को इकट्ठा कर गहराई में स्थित बड़ी शिराओं तक पहुंचाती हैं, जहां से यह खून दिल के रास्ते फेफड़ों में शुद्ध होने के लिए जाता है। हालांकि, यदि अंदरूनी शिराओं में किसी प्रकार की रुकावट आ जाए या खून का सही ढंग से बहाव न हो, तो यह अशुद्ध खून त्वचा की निचली सतह पर जमा होने लगता है, जिससे नसें नीली होकर बाहर की तरफ उभर आती हैं।
क्रोनिक वीनस इंसफिसिएंसी (CVI) और डीवीटी हैं प्रमुख कारण
उभरी हुई नीली नसों के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें जिम्मेदार होती हैं:
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क्रोनिक वीनस इंसफिसिएंसी (CVI): इस रोग में नसों के अंदर मौजूद वाल्व (कपाट) कमजोर हो जाते हैं। इसके चलते ऊपर जाने वाला अशुद्ध खून वापस नीचे की ओर आने लगता है और खाल के नीचे इकट्ठा होने लगता है। इसे प्राइमरी वेरीकोस वेंस कहा जाता है।
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डीप वेन थ्रंबोसिस (DVT): इस स्थिति में पैरों की नसों में अचानक खून के थक्के (Blood Clots) जम जाते हैं, जिससे शिराओं के जरिए खून के ऊपर चढ़ने का मार्ग पूरी तरह बाधित हो जाता है। जब नसों में अशुद्ध खून अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाता है, तो वे मकड़ी के जाले की तरह फैलकर बड़े आकार की हो जाती हैं, जिन्हें 'सेकेंडरी वेरीकोस वेंस' कहते हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी जरूरी
गर्भावस्था के दौरान यदि टांगों या जांघों पर मकड़ीनुमा नीली नसें दिखाई दें, तो महिलाओं को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इसके मुख्य कारण बच्चेदानी का नसों पर अत्यधिक दबाव पड़ना या डीवीटी के कारण खून के थक्के जमना हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में किसी अनुभवी वैस्कुलर सर्जन से तुरंत सलाह लेनी चाहिए। यदि अचानक पूरे पैर में सूजन आ जाए, तो लापरवाही बिल्कुल न बरतें, क्योंकि ये थक्के खिसककर फेफड़ों की नसों को बंद कर सकते हैं जिससे मरीज की सांस फूलने लगती है और जान का खतरा पैदा हो सकता है।
आधुनिक तकनीक से संभव है सटीक इलाज
यदि जांघ या पैर के किसी भी हिस्से में नीली नसों का जमाव दिखे, तो डॉप्लर स्टडी (Doppler Study), सीटी वीनोग्राम और डिजिटल सब्सट्रैक्शन वीनोग्राफी जैसी आधुनिक जांचों के जरिए सही कारणों का पता लगाया जाता है। इसके उपचार के प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं:
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वेनस एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग: नसों में स्थायी रुकावट होने पर यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि यह संभव न हो, तो वेनस बाईपास सर्जरी का सहारा लिया जाता है।
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लेजर तकनीक और RFA: यदि समस्या रुकावट की बजाय सीवीआई (CVI) की वजह से है, तो लेजर तकनीक या रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) का उपयोग किया जाता है। इस आधुनिक तकनीक के बाद मरीज अगले ही दिन से अपने सामान्य कामकाज पर लौट सकता है।
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दवाएं और कंप्रेशन स्टॉकिंग्स: यदि मर्ज शुरुआती अवस्था में है और नसों में रुकावट नहीं है, तो विशेष प्रकार की क्रमित दबाव वाली जुराबें (Compression Stockings), खास व्यायाम और दवाइयों के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया जाता है।