व्यापार

कच्चे तेल के बाजार में मचेगा तहलका! ईरान-अमेरिका महायुद्ध के बीच OPEC+ का बड़ा फैसला, क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

वैश्विक ईंधन बाजार (Global Fuel Market) में एक बार फिर से भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले तेल उत्पादक देशों के सबसे बड़े संगठन OPEC+ ने एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया है। सऊदी अरब और रूस जैसे शक्तिशाली तेल उत्पादक देशों वाले इस गठबंधन ने मई 2026 से कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। लगातार दूसरे महीने संगठन ने 2.06 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखना और आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाना है।इन्फ्रास्ट्रक्चर को पहुंचे भारी नुकसान की दी चेतावनीभले ही ओपेक प्लस (OPEC+) ने उत्पादन बढ़ाने का फैसला कर लिया है, लेकिन इसके साथ ही दुनिया को एक बड़ी चेतावनी भी दे डाली है। संगठन ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा समय में चल रहे भयानक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण तेल के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंच रहा है। युद्ध में तबाह हुए इस इन्फ्रास्ट्रक्चर को दोबारा खड़ा करने में और हालात को सामान्य बनाने में भारी भरकम पैसा और लंबा वक्त लगने वाला है।होर्मुज स्ट्रेट पर मंडरा रहा है युद्ध का खौफनाक सायाइस पूरे तेल संकट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में भड़का हुआ तनाव है। खासकर ईरान (Iran) और अमेरिका-इजरायल (US-Israel) के बीच चल रहे महायुद्ध ने पूरी दुनिया की तेल सप्लाई चेन की कमर तोड़कर रख दी है। इस महासंग्राम का सबसे भयंकर असर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर पड़ा है। आपको बता दें कि यह दुनिया का वह सबसे अहम समुद्री रास्ता है, जहां से युद्ध से पहले पूरी दुनिया के तेल और गैस का लगभग 20 फीसदी हिस्सा होकर गुजरता था। लेकिन अब ईरान द्वारा लगातार ऑयल टैंकरों को निशाना बनाने की खुली धमकियों के बाद इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से ठप पड़ गई है, जिसने ग्लोबल मार्केट की धड़कनें बढ़ा दी हैं।महंगाई का बम फूटने का है डर!ओपेक प्लस ने अपने आधिकारिक बयान में दुनिया के तमाम देशों को चेताया है कि अगर ऊर्जा सुविधाओं पर ऐसे ही मिसाइल हमले जारी रहे या समुद्री रास्तों को बाधित किया गया, तो तेल बाजार में ऐसी अस्थिरता आएगी जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। सबसे डराने वाली बात यह है कि इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक ही सीमित नहीं रहेगा। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों की लागत कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता पर महंगाई का बड़ा बम फूट सकता है।क्या सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही है इकलौता समाधान?हालांकि, इस भारी संकट के बीच कुछ देशों ने समझदारी दिखाते हुए तेल के निर्यात के लिए वैकल्पिक रास्तों (Alternate Routes) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार को थोड़ी बहुत राहत जरूर मिली है। फिर भी OPEC+ का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ तेल का उत्पादन बढ़ा देना ही इस संकट का इकलौता समाधान नहीं है। जब तक तेल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन (Supply Chain) को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं किया जाता, तब तक बाजार में स्थिरता नहीं आ सकती। अगर यह युद्ध और लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भयंकर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

Back to top button