उत्तर प्रदेश

‘बनारस की सभी 8 सीटों पर बीजेपी को हराएगी कांग्रेस’, अजय राय के इस बड़े दावे में कितना है दम और क्या हैं जमीनी समीकरण

'बनारस की सभी 8 सीटों पर बीजेपी को हराएगी कांग्रेस', अजय राय के इस बड़े दावे में कितना है दम और क्या हैं जमीनी समीकरण

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में भले ही अभी समय बाकी हो, लेकिन सूबे की सियासी बिसात पर शह और मात का खेल अभी से शुरू हो चुका है। साल 2027 में होने वाले महामुकाबले को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने एक ऐसा बड़ा और चौंकाने वाला बयान दे दिया है, जिसने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है। अजय राय ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) को लेकर हुंकार भरी है। उन्होंने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन मिलकर बनारस की सभी 8 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सूपड़ा साफ कर देंगे। आइए एक रिपोर्टर की नजर से इस बड़े दावे का विश्लेषण करते हैं और जानते हैं कि इसमें कितना दम है।

पीएम मोदी के गढ़ बनारस में कांग्रेस की बड़ी हुंकार वाराणसी को बीजेपी का सबसे मजबूत और अभेद्य किला माना जाता है, जहां से खुद पीएम मोदी सांसद हैं। ऐसे में अजय राय का यह बयान सीधे बीजेपी के सबसे बड़े गढ़ पर सीधी चुनौती है। कांग्रेस अध्यक्ष का मानना है कि पिछले कुछ समय में बनारस और आसपास के इलाकों में जनता के बीच स्थानीय मुद्दों, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर नाराजगी बढ़ी है। अजय राय ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अब घर-घर जाकर लोगों से संपर्क साध रहे हैं और जनता इस बार बदलाव के मूड में है। उनका यह आत्मविश्वास विपक्षी खेमे में नया जोश भर रहा है, लेकिन राजनीतिक पंडित इसे एक बेहद मुश्किल और साहसिक दावा मान रहे हैं।

क्या कहते हैं वाराणसी के मौजूदा राजनीतिक समीकरण अगर वाराणसी जिले की सभी 8 विधानसभा सीटों के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें, तो यहां बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का पूरी तरह से दबदबा रहा है। वाराणसी शहर की उत्तरी, दक्षिणी, कैंट, सेवापुरी, अजगरा, पिंडरा, शिवपुर और रोहनिया सीटों पर बीजेपी गठबंधन का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। पिछले चुनावों में कांग्रेस को यहां कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा था, खुद अजय राय भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में शून्य या बेहद कमजोर स्थिति से उठकर सभी 8 सीटों पर जीत दर्ज करना कांग्रेस के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। यही वजह है कि विरोधी दल अजय राय के इस दावे को पूरी तरह से 'हवा-हवाई' और कार्यकर्ताओं का दिल बहलाने वाला बयान बता रहे हैं।

गठबंधन की ताकत और स्थानीय मुद्दे बदलेंगे खेल? अजय राय के इस भरोसे के पीछे लोकसभा चुनाव के बदले हुए आंकड़े और समाजवादी पार्टी (SP) के साथ मजबूत गठबंधन की ताकत को माना जा रहा है। कांग्रेस रणनीति कारों का मानना है कि अगर सपा और कांग्रेस का कैडर जमीन पर एक साथ मिलकर पूरी ताकत से लड़ता है, तो वे बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकते हैं। इसके अलावा बुनकरों की समस्याएं, स्थानीय विकास की जमीनी हकीकत और एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) जैसे मुद्दों को भुनाकर कांग्रेस बनारस की राजनीति में एक नया इतिहास रचने का ख्वाब देख रही है।

बीजेपी की किलेबंदी को भेदना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती दूसरी तरफ, बीजेपी अपने इस सबसे वीवीआईपी गढ़ को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं रहती। बीजेपी का पन्ना प्रमुख से लेकर बूथ स्तर का मजबूत संगठन और खुद पीएम मोदी का चेहरा यहां पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। अजय राय के इस बयान के बाद निश्चित रूप से बीजेपी अपनी रणनीति को और ज्यादा आक्रामक बनाएगी। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि साल 2027 के रण में अजय राय का यह दावा महज एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाता है या फिर कांग्रेस सच में बनारस के इस सबसे मजबूत किले में कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होती है।

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