बिहार के विश्वविद्यालयों को राजभवन का अल्टीमेटम, समय पर होंगे एग्जाम और रिजल्ट, कुलाधिपति ने जारी किया फरमान

News India Live, Digital Desk: बिहार के उच्च शिक्षा जगत में व्याप्त ‘सत्र देरी’ और ‘रिजल्ट की लेट-लतीफी’ को लेकर राजभवन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (से.) सय्यद अता हसनैन ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को स्पष्ट आदेश दिया है कि शैक्षणिक सत्रों को हर हाल में नियमित किया जाए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा है कि परीक्षाओं के आयोजन और उनके परिणाम जारी करने में किसी भी तरह की कोताही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। कुलाधिपति के इस ‘सख्त एक्शन’ से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।हर हफ्ते होगी प्रगति की समीक्षा, रिपोर्ट कार्ड होगा तैयारराजभवन की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, कुलाधिपति अब हर सप्ताह राज्य के दो विश्वविद्यालयों के साथ सीधी समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पिछले निर्णयों के क्रियान्वयन की स्थिति जानना और अटके हुए रिजल्ट्स को जल्द से जल्द जारी करवाना होगा। राज्यपाल ने साफ कर दिया है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि विश्वविद्यालयों में जरूरी मानव बल (Staff) और संसाधन तुरंत मुहैया कराए जाएं।एकेडमिक कैलेंडर का पालन अनिवार्य, उल्लंघन पर होगी कार्रवाईबिहार के विश्वविद्यालयों में सत्रों की देरी एक पुरानी समस्या रही है, लेकिन अब राजभवन ने ‘टाइम-बाउंड’ एकेडमिक कैलेंडर को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। राज्यपाल ने आदेश दिया है कि:परीक्षा की तिथियां पहले से घोषित हों और उनमें बदलाव न किया जाए।कॉपियों का मूल्यांकन रिकॉर्ड समय में पूरा कर रिजल्ट पोर्टल पर अपलोड हो।छात्रों को डिग्री और सर्टिफिकेट के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। कुलाधिपति ने स्पष्ट किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समयबद्धता ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।75% उपस्थिति के बिना नहीं मिलेगा परीक्षा में प्रवेशनियमों को और कड़ा करते हुए राजभवन ने दोहराया है कि परीक्षा फॉर्म भरने के लिए छात्रों की 75% उपस्थिति अनिवार्य होगी। राज्यपाल ने कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे उन छात्रों के फॉर्म स्वीकार न करें जिनकी उपस्थिति कम है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में उचित जांच के बाद ही छूट दी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षा संचालन और शैक्षणिक माहौल को सुधारना है।छात्र-हित में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीतिराजभवन के इस फैसले का छात्र संगठनों और अभिभावकों ने स्वागत किया है। लंबे समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कुलाधिपति की यह निगरानी जारी रही, तो बिहार के विश्वविद्यालयों की साख फिर से लौटेगी और छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।