बेंगलुरु ट्रैफिक को गाली देने वाले सपा सांसद को डीके शिवकुमार का करारा जवाब दम है तो दिल्ली में मिलो

News India Live, Digital Desk : ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) हम भारतीयों की जिंदगी का एक ऐसा हिस्सा बन गया है, जिससे शायद ही कोई बच पाया हो। चाहे आप आम आदमी हों या खास, सड़क पर फंसी गाड़ियां किसी को नहीं बख्शतीं। लेकिन, इसी ट्रैफिक को लेकर अब राजनीति गरमा गई है और जुबानी जंग छिड़ गई है कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के नेताओं के बीच।मामला बड़ा दिलचस्प है। हाल ही में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सांसद राजीव राय (Rajeev Rai) बेंगलुरु गए थे। वहां के कुख्यात ट्रैफिक में वो ऐसे फंसे कि उनका मूड खराब हो गया। उन्होंने बेंगलुरु की व्यवस्था पर सवाल उठा दिए। बस, फिर क्या था! कर्नाटक के “संकटमोचक” और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) ने उन्हें ऐसा जवाब दिया, जिसकी चर्चा अब हर जगह हो रही है।’दिल्ली आइए, वहां का हाल दिखाता हूँ’सपा सांसद की आलोचना डीके शिवकुमार को बिल्कुल रास नहीं आई। उन्होंने राजीव राय को जवाब देते हुए कहा कि बेंगलुरु को कोसने से पहले उन्हें दिल्ली की सड़कों का हाल देख लेना चाहिए।शिवकुमार ने बड़े ही तीखे अंदाज़ में कहा- “राजीव राय जी, चलिए हम दोनों दिल्ली में मिलते हैं। मैं आपको वहां का ट्रैफिक दिखाता हूँ। सिर्फ बेंगलुरु को ही बदनाम क्यों किया जा रहा है?” उनका कहना था कि दिल्ली में संसद सत्र चल रहा है, वहां मिलिये और देखिए कि देश की राजधानी में गाड़ियां कैसे रेंगती हैं।’ट्रैफिक तो समृद्धि की निशानी है’इस बहस में डीके शिवकुमार ने एक ऐसा तर्क (Logic) दिया है, जिसे सुनकर लोग हैरान हैं। उन्होंने कहा कि अगर शहर में ट्रैफिक बढ़ रहा है, तो इसे बुरा मत मानिए। यह इस बात का सबूत है कि लोगों के पास पैसा आ रहा है, आर्थिक तरक्की हो रही है और लोग नई-नई कारें खरीद रहे हैं।उनका कहना था, “मेरे शहर (बेंगलुरु) में लोग बाज़ार से सब्ज़ी खरीदने की तरह कारें और गाड़ियाँ खरीद रहे हैं। अगर लोगों के पास पैसा है और वो गाड़ियाँ ले रहे हैं, तो सड़क पर भीड़ तो होगी ही। यह विकास का ही एक रूप है।”सांसद ने क्या कहा था?दरअसल, घोसी (यूपी) से सपा सांसद राजीव राय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो या बयान जारी कर बेंगलुरु के इन्फ्रास्ट्रक्चर की धज्जियां उड़ा दी थीं। शायद उनकी फ्लाइट या ट्रेन छूटने की नौबत आ गई होगी, जिसके बाद उन्होंने भड़ास निकाली। लेकिन शिवकुमार ने यह साफ कर दिया कि दुनिया के हर बड़े शहर में ट्रैफिक होता है, और बेंगलुरु को ‘टारगेट’ करना सही नहीं है।आप क्या सोचते हैं?डीके शिवकुमार का यह बयान कि ‘ट्रैफिक जाम अमीरी की निशानी है’ इस पर आपकी क्या राय है? क्या वाकई जाम को विकास का पैमाना मानना चाहिए या यह ख़राब मैनेजमेंट है? वैसे, एक बात तो माननी पड़ेगी, चाहे दिल्ली हो या बेंगलुरु, पिसता तो आम आदमी ही है!