बॉर्डर से घुसे और 2800 किलोमीटर दूर आकर रचने लगे नया संसार! मजे से कमा रहे थे पैसे, ऐसे खुली 8 बांग्लादेशियों की पोल

देश की आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) में अवैध रूप से दाखिल होने के बाद, आठ बांग्लादेशी नागरिक सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर पूरे 2800 किलोमीटर दूर भारत के दूसरे कोने में पहुंच गए। वे यहां पहचान छिपाकर न केवल आराम से रह रहे थे, बल्कि विभिन्न स्थानीय कामों में लगकर अच्छे पैसे भी कमा रहे थे। लेकिन कानून के लंबे हाथों से वे ज्यादा दिन बच नहीं सके और एक खुफिया इनपुट के आधार पर स्थानीय पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए सभी आठों घुसपैठियों को धर दबोचा है।
सुरक्षा में बड़ी चूक: कैसे पार किया बॉर्डर और तय किया 2800 किमी का सफर?
इस मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान हैं कि बिना किसी वैध दस्तावेज (Valid Passport & Visa) के ये नागरिक भारत-बांग्लादेश सीमा पार करने में कैसे सफल रहे। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि इन लोगों ने सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय मानव तस्करी और अवैध दलालों के नेटवर्क की मदद ली थी। बॉर्डर पार करने के बाद, उन्होंने ट्रेनों और अन्य लोकल साधनों का इस्तेमाल किया और बिना किसी चेकिंग के देश के भीतर 2800 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर ली। सुरक्षा मामलों के जानकार इसे इंटेलिजेंस और बॉर्डर मॉनिटरिंग सिस्टम में एक बड़ा लूपहोल मान रहे हैं, जिसकी गहन जांच की जा रही है।
स्थानीय स्तर पर बनाई फर्जी पहचान, पुलिस की पैनी नजर से खुली पोल
मामले की जांच कर रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है: "पकड़े गए सभी बांग्लादेशी नागरिक स्थानीय स्तर पर कम किराए वाले इलाकों (Labor Pockets) में रह रहे थे। उन्होंने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए कुछ फर्जी भारतीय पहचान पत्र भी तैयार करवा लिए थे, ताकि किसी को शक न हो। वे स्थानीय कंस्ट्रक्शन साइट्स, फैक्ट्रियों और होटलों में मजदूरी कर रहे थे। पुलिस को इनके बारे में एक गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाकर संदिग्धों को वेरिफिकेशन के लिए हिरासत में लिया गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर इन्होंने अपना बांग्लादेशी होना कबूल कर लिया।"
पुलिस अब इस बात की तफ्तीश में जुटी है कि इन अवैध प्रवासियों को स्थानीय स्तर पर पनाह देने और इनके फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने में किन स्थानीय लोगों या दलालों का हाथ था।
टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ेगा वेरिफिकेशन ड्राइव, एलियन एक्ट में केस दर्ज
इस बड़ी कामयाबी के बाद, पुलिस प्रशासन ने टियर-2 और टियर-3 शहरों के सभी मकान मालिकों, ठेकेदारों और फैक्ट्री मालिकों के लिए सख्त हिदायत जारी की है। स्थानीय स्तर पर बाहर से आकर काम करने वाले किसी भी मजदूर या किराएदार को रखने से पहले उनका पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification Drive) कराना अब अनिवार्य कर दिया गया है। पकड़े गए सभी आठों आरोपियों के खिलाफ फॉरेनर्स एक्ट (Foreigners Act) और अवैध घुसपैठ की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्हें जेल भेजने के साथ ही अब डिपोर्टेशन (स्वदेश वापसी) की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस घटना ने देश के विभिन्न राज्यों में चल रहे अवैध प्रवासियों के इनसाइड नेटवर्क पर एक बार फिर से सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।