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Consumer Court Crisis : सामान खराब और सेवा बेकार, फिर भी इंसाफ के लिए तरस रहा उपभोक्ता, जानें क्यों दम तोड़ रहा कंज्यूमर फोरम?

News India Live, Digital Desk : भारत में ‘जागो ग्राहक जागो’ का नारा तो हर घर तक पहुँचा, लेकिन जब हकीकत में ग्राहक के साथ धोखाधड़ी होती है, तो इंसाफ की डगर बेहद पथरीली नजर आती है। एक तरफ भारतीय उपभोक्ता बाजार (Consumer Market) रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता विवाद निवारण प्रणाली (Consumer Disputes Redressal System) बोझ तले दबी जा रही है। उपभोक्ता और न्याय के बीच बढ़ती यह खाई अब चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि लाखों लोग अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते थक चुके हैं।बाजार बढ़ा पर व्यवस्था पड़ी पीछेपिछले एक दशक में ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट ने भारतीय बाजार की सूरत बदल दी है। आज गांव के एक कोने में बैठा व्यक्ति भी मोबाइल से सामान मंगा रहा है। बाजार बढ़ने के साथ शिकायतों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो उपभोक्ता अदालतों में लंबित मामलों का अंबार लगा हुआ है। विडंबना यह है कि जिस गति से नए विवाद पैदा हो रहे हैं, उस गति से पुराने मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है।तारीख पर तारीख: क्यों अटक रहा है इंसाफ?कंज्यूमर फोरम बनाने का मुख्य उद्देश्य था कि ग्राहकों को कम समय और बिना किसी जटिल कानूनी प्रक्रिया के न्याय मिले। लेकिन हकीकत इसके उलट है। अदालतों में जजों और स्टाफ की भारी कमी, बुनियादी ढांचे का अभाव और कंपनियों द्वारा कानूनी पेच फंसाकर मामले को लंबा खींचने की प्रवृत्ति ने इस सिस्टम को सुस्त बना दिया है। एक छोटे से रिफंड या खराब प्रोडक्ट के बदले न्याय पाने में उपभोक्ता को सालों साल चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उसका विश्वास इस व्यवस्था से उठने लगा है।ई-दाखिल और तकनीकी समाधान भी नाकाफीसरकार ने उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए ‘ई-दाखिल’ (e-Daakhil) पोर्टल जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, ताकि लोग घर बैठे शिकायत दर्ज करा सकें। तकनीक ने शिकायत दर्ज करना तो आसान बना दिया, लेकिन सुनवाई की प्रक्रिया अभी भी पुरानी और धीमी है। ऑनलाइन सुनवाई की कमी और फिजिकल फाइलों का अंबार आज भी न्याय की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। जब तक हर जिले के फोरम में रिक्त पदों को नहीं भरा जाता, तब तक तकनीक का पूरा लाभ मिलना मुश्किल है।उपभोक्ता के पास क्या है रास्ता?मौजूदा स्थिति में उपभोक्ताओं को जागरूक रहने के साथ-साथ सतर्क रहना भी जरूरी है। किसी भी विवाद की स्थिति में उपभोक्ता को सबसे पहले कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करना चाहिए। यदि समाधान न मिले तो नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1800-11-4000) पर कॉल करना एक प्रभावी कदम हो सकता है। जानकारों का कहना है कि सरकार को न केवल कानूनों को सख्त करना होगा, बल्कि जिला और राज्य स्तर पर उपभोक्ता अदालतों की संख्या बढ़ाकर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करना होगा ताकि ‘इंसाफ’ केवल किताबों तक सीमित न रहे।

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