भारतीय सेना में शामिल होंगे 60 घातक लड़ाकू विमान और S-400 मिसाइल, आसमान में दिखेगा भारत का काल रूप

News India Live, Digital Desk: सरहदों पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय वायुसेना अब दुनिया की सबसे अभेद्य दीवार बनने की ओर अग्रसर है। केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में एक ऐसा मेगा प्लान तैयार किया है, जिससे ड्रैगन (चीन) और पाकिस्तान के हौसले पस्त होना तय है। जल्द ही भारतीय सैन्य बेड़े में 60 नए अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और दुनिया का सबसे खतरनाक माना जाने वाला S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तैनात होने जा रहा है। इस महाशक्ति के जुड़ने से भारत की ‘आसमानी ताकत’ में इतनी बढ़ोतरी होगी कि दुश्मन का परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा।दुश्मन के घर में घुसकर मारेंगे ये 60 ‘बाज’, राफेल जैसी मिलेगी ताकतवायुसेना की मारक क्षमता को दोगुना करने के लिए सरकार ने 60 नए फाइटर जेट्स की खरीद और अपग्रेडेशन पर मुहर लगा दी है। ये विमान न केवल लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम हैं, बल्कि इनमें लगा रडार सिस्टम दुश्मन के रडार की पकड़ में आए बिना उसे तबाह कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों के आने से एलएसी (LAC) और एलओसी (LoC) पर भारत की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। ये विमान ‘मल्टी-रोल’ क्षमता वाले हैं, जो रात के अंधेरे में भी सटीक निशाना साधने में माहिर हैं।S-400: वो ‘ब्रह्मास्त्र’ जिससे थर-थर कांपेगा बीजिंग और इस्लामाबादरूसी तकनीक से लैस S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की नई यूनिट्स की तैनाती भारत के लिए किसी गेम-चेंजर से कम नहीं है। यह सिस्टम एक साथ 36 लक्ष्यों को निशाना बना सकता है और 400 किलोमीटर की रेंज में किसी भी मिसाइल, ड्रोन या फाइटर जेट को हवा में ही राख करने की ताकत रखता है। खास बात यह है कि यह दुनिया का एकमात्र ऐसा सिस्टम है जो अमेरिका के सबसे आधुनिक स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सकता है। इसकी तैनाती के बाद भारत का पूरा हवाई क्षेत्र एक ‘सुरक्षा कवच’ में तब्दील हो जाएगा।आत्मनिर्भर भारत का दम: देसी हथियारों का भी दिखेगा जलवाइस रक्षा सौदे में केवल विदेशी तकनीक ही नहीं, बल्कि ‘मेड इन इंडिया’ का भी बड़ा हिस्सा है। 60 विमानों के बेड़े में कई स्वदेशी तकनीक और मिसाइलें शामिल की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत न केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करे, बल्कि दुनिया को हथियार निर्यात करने वाला बड़ा केंद्र भी बने। रक्षा मंत्रालय के इस कदम से भारतीय सेना की ‘लॉन्ग रेंज स्ट्राइक’ क्षमता कई गुना बढ़ गई है, जो हिंद महासागर से लेकर हिमालय की चोटियों तक भारत का दबदबा कायम रखेगी।