भारत के पेट्रोलियम निर्यात ने रचा इतिहास! विदेशी तेल खरीदकर दुनिया को पेट्रोल-डीजल बेच रहा देश, रिफाइनिंग क्षमता में 75,000 करोड़ का मेगा बूस्ट

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल और गैस के आयात (Import) पर अत्यधिक निर्भर है। अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 80 से 85 फीसदी तक कच्चा तेल भारत विदेशों से खरीदता है, जिस पर हर साल भारी-भरकम विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) खर्च होती है। लेकिन आपको यह जानकर बेहद गर्व होगा कि विदेशों से कच्चा तेल खरीदने वाले भारत ने पेट्रोलियम एक्सपोर्ट (Petroleum Export) के मोर्चे पर दुनिया भर में एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।
भारत विदेशों से कच्चा तेल आयात तो करता है, लेकिन देश की आधुनिक रिफाइनरियों में उसे प्रोसेस (रिफाइन) करके पेट्रोल, डीजल, एटीएफ (हवाई ईंधन) और अन्य मूल्यवान पेट्रोलियम उत्पाद बनाकर दुनिया के कई बड़े देशों को भारी मात्रा में निर्यात भी करता है।
पेट्रोलियम रिफाइनर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में भारत का दबदबा, बना नया रिकॉर्ड
ग्लोबल मार्केट में पेट्रोलियम रिफाइनर प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्टर के तौर पर आज भारत का जबरदस्त दबदबा कायम हो चुका है। बीते वित्तीय वर्ष के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने रिकॉर्ड 46.8 अरब डॉलर का पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट किया है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का दावा है कि आने वाले दिनों में भारत के इस कुल एक्सपोर्ट में करीब 25 फीसदी तक की और बंपर बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
जिस तेजी से देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) अपनी विभिन्न रिफाइनरियों की क्षमता का विस्तार कर रही है, उससे भारत की ग्लोबल रिफाइनिंग ताकत सुपरफास्ट स्पीड से बढ़ रही है। वर्तमान में भारत की कुल रिफाइनिंग कैपेसिटी करीब 258.1 मिलियन टन है, जबकि देश की आंतरिक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कुल खपत 239 मिलियन टन के आसपास है।
₹75,000 करोड़ का मेगा बजट: IOCL बढ़ा रही है अपनी ताकत
भारत सरकार की ओर से देश की रिफाइनिंग कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। दिसंबर 2026 तक आईओसीएल (IOCL) की कई नई रिफाइनिंग इकाइयां पूरी तरह से चालू होने वाली हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट के जमीन पर उतरने के बाद IOCL की कुल रिफाइनिंग क्षमता 80.75 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) से लंबी छलांग लगाकर सीधे 98.05 MMTPA के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने इस महत्वाकांक्षी क्षमता विस्तार प्रोजेक्ट के लिए 75,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, जिसमें से अब तक 53,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सफलता पूर्वक खर्च की जा चुकी है।
एक्सपोर्ट से रेवेन्यू में होगी 3 गुना बढ़ोतरी, पानीपत और वड़ोदरा में काम तेज
सरकारी तेल कंपनियां अपनी इस नई और आधुनिक क्षमता का इस्तेमाल सबसे पहले घरेलू बाजार की जरूरतों को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए करेंगी। इसके बाद जो अतिरिक्त (Surplus) कैपेसिटी बचेगी, उसका उपयोग पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए आक्रामक रूप से किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस कदम से कंपनी के कुल रेवेन्यू (राजस्व) में पेट्रोलियम एक्सपोर्ट का हिस्सा वर्तमान के 5% से तीन गुना बढ़कर सीधे 15% के पार पहुंच सकता है।
वर्तमान में कंपनी द्वारा हरियाणा के पानीपत, गुजरात के वड़ोदरा और बिहार की बरौनी रिफाइनरी में क्षमता को अपग्रेड करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
जानिए किस रिफाइनरी की क्षमता कितनी बढ़ेगी?
देश की तीन प्रमुख रिफाइनरियों में क्षमता विस्तार का पूरा गणित इस प्रकार है:
| रिफाइनरी का नाम | वर्तमान क्षमता (Current Capacity) | विस्तार के बाद क्षमता (Post Expansion) |
| पानीपत रिफाइनरी | 15 MMTPA | 25 MMTPA |
| वड़ोदरा रिफाइनरी | 13.7 MMTPA | 18 MMTPA |
| बरौनी रिफाइनरी | 6 MMTPA | 9 MMTPA |
इस शानदार क्षमता विस्तार के बाद भारत न केवल अपनी घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को पूरी तरह से आत्मनिर्भर और मजबूत बना लेगा, बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक बड़े ग्लोबल पेट्रोलियम हब के रूप में उभरकर सामने आएगा, जिससे देश के खजाने में अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की एंट्री होगी।