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सर्दियों का ‘लाल सोना’: सिर्फ 2-3 महीने में गाजर की खेती से होगी बंपर कमाई, जानें सही तरीका

जैसे ही हल्की ठंड शुरू होती है,हमारी रसोई में गाजर का हलवा बनने की खुशबू और सलाद में लाल गाजर की जगह पक्की हो जाती है। सर्दियों का मौसम गाजर उगाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस मौसम की ठंडक गाजर में वो मिठास और गहरा लाल रंग भर देती है,जिसकी मांग बाजार में सबसे ज्यादा होती है।गाजर सिर्फ खाने में ही मजेदार नहीं होती,बल्कि यह विटामिन ए और कई खनिजों का खजाना है। अगर आप किसान हैं तो यह आपके लिए’मुनाफे की खेती’है और अगर आप गार्डनिंग के शौकीन हैं,तो घर की क्यारी में इसे उगाकर आप अपने परिवार को ताजी और केमिकल-मुक्त सब्जी खिला सकते हैं।आइए,आसान भाषा में समझते हैं कि इसकी खेती कैसे करें कि पैदावार भी अच्छी हो और मेहनत भी रंग लाए।1.कैसी हो मिट्टी और मौसम?गाजर को बहुत ज्यादा गर्मी पसंद नहीं है। इसके लिए18से24डिग्री सेल्सियसका तापमान सबसे बढ़िया रहता है। मिट्टी की बात करें तोगहरी और भुरभुरी दोमट मिट्टीइसके लिए सोने पे सुहागा है। अगर मिट्टी सख्त होगी तो गाजर का आकार टेढ़ा-मेढ़ा हो सकता है,इसलिए खेत तैयार करते समय मिट्टी को अच्छे से भुरभुरा बना लें।2.बीज की सही किस्में चुनेंअच्छी फसल के लिए बीज का सही होना बहुत जरूरी है। बाजार में कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। आप’पूसा केसर’, ‘नेन्टिस’, ‘पूसा मंदाकिनी’, ‘सलेक्शन-5’या’पूसा नयनज्योति’जैसी किस्मों का चुनाव कर सकते हैं। ये किस्में अच्छी पैदावार और बढ़िया रंग के लिए जानी जाती हैं।3.बुवाई का सही तरीकाबुवाई करते समय एक बात का खास ख्याल रखें—पौधों को सांस लेने की जगह मिलनी चाहिए।दूरी:कतार से कतार की दूरी30सेमी और एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी8-10सेमी रखें।बीज:एक हेक्टेयर खेत के लिए करीब5से6किलो बीज काफी होते हैं।पानी और सफाई:बीज डालने के बाद हल्की सिंचाई करें। बीच-बीच में खेत से खरपतवार (फालतू घास) निकालते रहें ताकि सारा पोषण आपकी गाजर को ही मिले।4.खाद: पौधों का खाना-पीनाजमीन की ताकत बढ़ाने के लिए बुवाई से पहले250क्विंटल गोबर की खादप्रति हेक्टेयर डालें। इसके अलावा रसायनिक खाद में नत्रजन (60किलो),फॉस्फोरस (40किलो) और पोटाश (120किलो) का इस्तेमाल करें।टिप:नत्रजन की आधी मात्रा और बाकी सारी खाद पहली जुताई में ही डाल दें। बची हुई नत्रजन को फसल के45दिन का होने पर डालें,इससे पौधों में जान आ जाएगी।5.बीमारी से बचाव और कटाईगाजर में अक्सर’कट वर्म’ (कीड़ा) या पत्तियों पर धब्बे लगने की बीमारी हो सकती है। इससे बचने के लिए समय-समय पर फसल को चेक करते रहें और जरूरत पड़ने परमेंकोजेबयाडाइनोकेपजैसी दवाओं का छिड़काव करें।फसल तैयार:आपकी मेहनत का फल आपको60से85दिनोंके अंदर मिल जाएगा। एक बात का ध्यान रखें,जैसे ही गाजर तैयार हो जाए,उसे जमीन से निकाल लें। ज्यादा दिन तक जमीन में रहने पर गाजर सख्त हो जाती है और स्वाद खराब हो जाता है।तो देर किस बात की?इस सर्दी अपनी जमीन का सही इस्तेमाल करें और लाल गाजर की मिठास का आनंद लें।

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