महाकुंभ से चर्चा में आईं मोनालिसा की शादी पर कानूनी घमासान: केरल हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, कोर्ट में गूंजी तीखी दलीलें

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर रातों-रात मशहूर हुईं मोनालिसा भोंसले एक बार फिर देश भर में सुर्खियों में हैं। हालांकि, इस बार वजह उनका कोई वीडियो नहीं, बल्कि उनकी शादी को लेकर दो राज्यों के बीच चल रही कानूनी और राजनीतिक रस्साकशी है। एक मुस्लिम युवक से शादी करने के बाद उपजे विवाद के बीच यह मामला अब केरल हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है, जहां अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
आपको बता दें कि मेले में मोतियों की माला बेचते हुए वायरल हुईं मोनालिसा और उनके पति मोहम्मद फरमान खान ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने इस पर लंबी सुनवाई की और संकेत दिए कि अदालत जल्द ही अपना आदेश सुना सकती है। सुनवाई के दौरान शादी के तौर-तरीकों, लड़की की असली उम्र और जोड़े को मिल रही धमकियों पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच काफी तीखी बहस देखने को मिळाली।
"आप खुशकिस्मत हैं कि केरल में हैं" — जज की टिप्पणी ने खींचा ध्यान
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कपल के वकील ने कोर्ट के सामने दलील दी कि उनके मुवक्किलों ने मध्य प्रदेश में जब से शादी की है, तब से उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और अलग-अलग कट्टपंथी समूहों द्वारा उनका मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
कोर्ट रूम की बातचीत
इस दलील पर जज ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "आप भाग्यशाली हैं कि आप केरल में हैं।" इस पर सहमति जताते हुए मोनालिसा के वकील ने तुरंत जवाब दिया, "माई लॉर्ड, यही एकमात्र मुख्य कारण है कि वे दोनों आज जिंदा खड़े हैं।"
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें: एक नजर में
इस पूरे मामले को लेकर लड़की के परिवार/मध्य प्रदेश सरकार और खुद शादी करने वाले जोड़े के बीच उम्र और कागजातों को लेकर बड़ा विवाद है। दोनों पक्षों के दावों को आप नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
सीपीएम नेताओं तक पहुंची आंच, राजनीतिक रूप से संवेदनशील हुआ मामला
यह मामला केवल दो राज्यों (मध्य प्रदेश और केरल) की अदालतों की समानांतर कार्यवाही तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें बड़ी राजनीतिक एंट्री भी हो चुकी है। तिरुवनंतपुरम की एक पॉक्सो (POCSO) अदालत में एक निजी शिकायत दर्ज कराई गई है। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस अंतरधार्मिक (Interfaith) विवाह को संरक्षण देने और बढ़ावा देने में केरल के सत्तारूढ़ दल सीपीआई(एम) के कई दिग्गज नेताओं की भूमिका रही है।
इस शिकायत में सीपीएम के बड़े नेताओं जैसे एमवी गोविंदम, वी शिवनकुट्टी और एए रहीम के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की गई है। इस राजनीतिक जुड़ाव के कारण इस केस पर अब पूरे देश की नजरें टिक गई हैं। अब देखना यह होगा कि केरल हाई कोर्ट इस संवेदनशील मामले में अग्रिम जमानत को लेकर क्या रुख अपनाता है।