धर्म

महादेव के 5 रहस्यमयी अवतार अघोर से ईशान तक, जानिए भगवान शिव ने जगत कल्याण के लिए क्यों लिए ये रूप?

News India Live, Digital Desk : सनातन धर्म और शिव महापुराण में भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा गया है। मान्यता है कि जगत के कल्याण और सृष्टि के सुचारू संचालन के लिए महादेव अलग-अलग कल्पों में कई रूपों में अवतरित हुए हैं। इनमें से भगवान शिव के 5 अवतारों सद्योजात, वामदेव, तत्पुरुष, अघोर और ईशान को सबसे प्रमुख माना गया है। इन्हीं पांच रूपों को महादेव की प्रतिमा के ‘पंचमुख’ के रूप में भी पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा को इन अवतारों का रहस्य बताते हुए कहा था कि परमपिता ब्रह्मा उनके अनुपम भक्त हैं। ब्रह्मा जी की भक्ति से प्रसन्न होकर ही महादेव प्रत्येक कल्प में उन्हें दर्शन देते हैं और सृष्टि निर्माण में आ रही उनकी सभी बाधाओं को दूर करते हैं। आइए जानते हैं महादेव के इन 5 कल्याणकारी अवतारों की रहस्यमयी कथा।सद्योजात: महादेव का प्रथम अवतारशिव महापुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करने में स्वयं को असमर्थ पा रहे थे, तब उन्होंने परमेश्वर शिव का ध्यान किया। उनके ध्यान से प्रसन्न होकर महादेव ने ‘सद्योजात’ रूप में अपना पहला अवतार लिया। इस अवतार में भगवान शिव श्वेत और लोहित (लाल) वर्ण के एक दिव्य कुमार के रूप में प्रकट हुए थे। महादेव ने इसी सद्योजात रूप में ब्रह्मा जी को ज्ञान दिया और उन्हें सृष्टि रचना की असीम शक्ति प्रदान की।वामदेव: अज्ञान दूर करने वाला दूसरा रूपसृष्टि के बीसवें कल्प यानी ‘रक्त कल्प’ में ब्रह्मा जी ने जब एक तेजस्वी पुत्र की कामना से परमेश्वर का स्मरण किया, तब महादेव ने अपना दूसरा अवतार ‘वामदेव’ के रूप में लिया। इस अवतार में भगवान शिव लाल रंग के वस्त्र और आभूषण धारण किए हुए प्रकट हुए थे। शिव जी के इस ‘वामदेव’ रूप ने ब्रह्मा जी के जीव-सुलभ अज्ञान को पूरी तरह से दूर किया और उन्हें सृष्टि के विस्तार की नई ऊर्जा दी।तत्पुरुष: पीत वस्त्र धारण करने वाला तीसरा अवतारइक्कीसवें कल्प में जब सृष्टि के विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ी, तब महादेव ने ‘तत्पुरुष’ के रूप में अपना तीसरा अवतार लिया। इस कल्प को ‘पीतवासा’ भी कहा जाता है। इस रूप में भगवान शिव पीले रंग के वस्त्र (पीत वर्ण) धारण किए हुए प्रकट हुए थे। तत्पुरुष अवतार को गुणों का आश्रय माना जाता है, जो जगत को सही दिशा और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।अघोर: महाभयंकर और संकट मोचक चौथा अवतारशिव कल्प के दौरान जब ब्रह्मा जी एक बार फिर सृष्टि की रचना और जीवों के कल्याण को लेकर गहरी चिंता में डूब गए, तब महादेव ने उन्हें ‘अघोर’ रूप में दर्शन दिए। भगवान शिव का यह चौथा अवतार महाभयंकर और कृष्ण-पिंगल (काले) वर्ण वाला था। इस रूप में महादेव ने काले वस्त्र, काली पगड़ी, काला यज्ञोपवीत और सिर पर काला मुकुट धारण किया हुआ था। अघोर रूप भले ही देखने में भयंकर हो, लेकिन यह भक्तों के सारे संकट हरने वाला अत्यंत कल्याणकारी स्वरूप है।ईशान: सृष्टि का स्वामी और पांचवां अवतारमहादेव का पांचवां और सर्वोच्च अवतार ‘ईशान’ है। ईशान को शिव का ऊर्ध्व मुख (ऊपर की ओर देखने वाला मुख) कहा जाता है। ईशान का शाब्दिक अर्थ ही ‘स्वामी’ या अधिपति होता है। यह स्वरूप दुग्ध के समान श्वेत वर्ण का है। ईशान रूप में महादेव संपूर्ण जगत का नियंत्रण करते हैं और चराचर जगत को परम शांति और मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।

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