महाराष्ट्र चुनाव से पहले चुनाव आयोग में घमासान, CEO ने अपनी ही संस्था के टाइमलाइन पर उठाए सवाल क्या टल जाएगी वोटिंग?

News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। चुनाव आयोग (ECI) के भीतर ही तालमेल की कमी और खींचतान की स्थिति बनती दिख रही है। ताजा घटनाक्रम में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने आयोग द्वारा जारी ‘स्पेशल समरी रिवीज़न’ (SSR) की टाइमलाइन पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। इस विरोध ने न केवल चुनावी तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है कि क्या इसका असर मतदान की तारीखों पर पड़ सकता है?टाइमलाइन को लेकर क्यों अड़े महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी?सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के सीईओ ने केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजे अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि वर्तमान में तय की गई समय सीमा (Timeline) व्यावहारिक नहीं है। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और दावों के निपटारे के लिए जिस गति की अपेक्षा की जा रही है, वह जमीनी स्तर पर अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। सीईओ का तर्क है कि यदि इस प्रक्रिया में जल्दबाजी की गई, तो मतदाता सूची में त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होने का डर है।भीतर की रार: चुनाव आयोग बनाम राज्य निर्वाचन मशीनरीआमतौर पर चुनाव आयोग और राज्यों के निर्वाचन कार्यालयों के बीच समन्वय बेहद मजबूत होता है, लेकिन इस बार मामला अलग दिख रहा है। महाराष्ट्र सीईओ की ओर से उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर केंद्रीय आयोग के निर्देशों को चुनौती देने जैसा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में आगामी त्योहारों और प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण कर्मचारी पहले से ही दबाव में हैं, ऐसे में नई डेडलाइन का पालन करना लगभग असंभव लग रहा है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली स्थित मुख्यालय इस आपत्ति पर क्या रुख अपनाता है।क्या चुनाव की तारीखों पर पड़ेगा असर?इस आंतरिक विवाद के बाद अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तारीखें आगे बढ़ सकती हैं। यदि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में देरी होती है, तो चुनाव प्रक्रिया का पूरा कैलेंडर प्रभावित हो सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष इसे चुनाव टालने की साजिश बता सकता है, जबकि सरकार इसे पूरी तरह प्रशासनिक मामला करार दे रही है। फिलहाल, गेंद केंद्रीय चुनाव आयोग के पाले में है।