मुश्किल वक्त में नेपाल का सच्चा मददगार बना भारत: 10 टन आपात राहत सामग्री और जीवनरक्षक दवाओं के साथ एयरफोर्स का विशेष विमान रवाना

पड़ोसी मुल्क नेपाल में भारी बारिश, विनाशकारी भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से मची भीषण तबाही के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी अटूट दोस्ती और 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति का परिचय दिया है। संकट की इस विकट घड़ी में संकटमोचक बनते हुए भारत सरकार ने नेपाल के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भारतीय वायुसेना (IAF) का एक भारी सैन्य परिवहन विमान 10 टन से अधिक आपातकालीन राहत सामग्री और जीवनरक्षक दवाओं की पहली खेप लेकर नई दिल्ली के हिंडन एयरबेस से काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गया है।
राहत सामग्री में क्या-क्या शामिल: बेघरों और घायलों के लिए फौरी मदद
नेपाल सरकार द्वारा व्यक्त की गई प्राथमिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारत की ओर से भेजी गई इस 10 टन की राहत खेप में विस्थापित और बेघर हुए लोगों के लिए आवश्यक बुनियादी सामग्रियां शामिल की गई हैं।
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आपातकालीन आश्रय किट: भारी बारिश और ठंड से बचाव के लिए सैकड़ों वॉटरप्रूफ फैमिली टेंट, स्लीपिंग बैग्स, तिरपाल (Tarpaulins) और गर्म कंबल भेजे गए हैं।
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जीवनरक्षक दवाएं और मेडिकल सप्लाई: बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक, ओआरएस (ORS) के पैकेट्स, एंटी-वेनम, बर्न ऑइंटमेंट्स, पट्टियां और सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।
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वॉटर प्यूरिफिकेशन और हाइजीन किट्स: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दूषित पेयजल से होने वाली महामारियों से बचाने के लिए क्लोरीन की गोलियां, वाटर प्यूरिफिकेशन यूनिट्स, सैनिटरी पैड्स, साबुन और कीटाणुनाशक तरल पदार्थ बड़ी मात्रा में भेजे गए हैं।
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रेडी-टू-ईट फूड पैकेट्स: संपर्क कट जाने वाले दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों के लिए तुरंत उपभोग योग्य पौष्टिक सूखा राशन और ऊर्जावर्धक खाद्य पैकेट्स भी इस खेप का हिस्सा हैं।
'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के रूप में भारत का अटूट संकल्प
विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के संयुक्त समन्वय से संचालित इस राहत मिशन पर भारत ने स्पष्ट किया है कि वह नेपाल के लोगों और सरकार के साथ इस कठिन समय में पूरी मजबूती से खड़ा है। भारत हमेशा से दक्षिण एशियाई क्षेत्र में किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय 'सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाला' (First Responder) देश रहा है।
चाहे वर्ष 2015 का प्रलयंकारी भूकंप रहा हो या 2023 का जाजरकोट भूकंप, भारतीय सशस्त्र बलों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने हमेशा ग्राउंड जीरो पर उतरकर हजारों जिंदगियां बचाई हैं। भारतीय दूतावास काठमांडू में नेपाली गृह मंत्रालय और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ 24 घंटे लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि राहत सामग्री को बिना किसी देरी के वास्तविक प्रभावितों तक सीधे पहुंचाया जा सके।
ग्राउंड जीरो पर रेस्क्यू में अतिरिक्त सहयोग को तैयार भारत
राहत सामग्री भेजने के अलावा, भारत सरकार ने नेपाल को यह भी आश्वासन दिया है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो एनडीआरएफ की विशेषज्ञ खोज एवं बचाव टीमें (Urban Search & Rescue Teams), स्निफर डॉग्स, सैटेलाइट संचार उपकरण और भारतीय सेना के विशेष रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी तुरंत स्टैंडबाय मोड से नेपाल के लिए उड़ान भरने को तैयार हैं।
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और सीमावर्ती नदियों के उफान को देखते हुए दोनों देशों के हाइड्रोलॉजिकल विभाग और बाढ़ नियंत्रण केंद्र रीयल-टाइम डेटा साझा कर रहे हैं, ताकि सीमा के दोनों ओर जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
भारत की इस त्वरित और उदार सहायता का नेपाल के प्रशासन और स्थानीय जनता ने गर्मजोशी से स्वागत किया है, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आत्मीय 'रोटी-बेटी' के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।