उत्तर प्रदेश

मेदांता अस्पताल पर परिजनों का बड़ा आरोप: ‘पैसे के लालच में मरीज की जिंदगी से खिलवाड़’, डॉक्टर और प्रबंधन के खिलाफ हंगामा; जानें क्या है पूरा मामला

देश के नामचीन निजी अस्पतालों में गिने जाने वाले 'मेदांता अस्पताल' (Medanta Hospital) पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर पैसे कमाने के लालच में इलाज के साथ खिलवाड़ करने और अनैतिक रवैया अपनाने का संगीन आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक परिजनों और समर्थकों ने हंगामा किया। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल पर 'प्रॉफिट मेकिंग' और अनावश्यक ट्रीटमेंट/वेंटिलेटर सपोर्ट के नाम पर भारी-भरकम बिल थमाने के आरोप लगे हों।

परिजनों का आरोप: "बिना जरूरत आईसीयू में रखा और थमा दिया लाखों का बिल"

पीड़ित परिवार का दावा है कि मरीज को हल्की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने डराकर तुरंत आईसीयू (ICU) और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया। परिजनों का मुख्य आरोप है कि:

  • अनावश्यक मेडिकल प्रोसीजर: परिजनों के अनुसार, मरीज की हालत में सुधार होने के बावजूद उसे डिस्चार्ज नहीं किया गया और कई ऐसी जांचें व दवाएं लिख दी गईं जिनकी कोई खास आवश्यकता नहीं थी।

  • लाखों का बिल: जब परिजनों ने मरीज को किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने या डिस्चार्ज करने की बात कही, तो उन्हें लाखों रुपये का लंबा-चौड़ा बिल थमा दिया गया और पैसे न चुकाने तक कागजात और मरीज को रोकने का प्रयास किया गया।

अस्पताल प्रशासन की सफाई और पुलिस की दखल

हंगामे और मीडिया के पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। वहीं मेदांता अस्पताल प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपनी सफाई दी है:

  • अस्पताल का पक्ष: प्रबंधन का कहना है कि मरीज की मेडिकल कंडीशन बेहद क्रिटिकल (गंभीर) थी और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल प्रोटोकॉल (Medical Protocols) के तहत ही उसका इलाज किया जा रहा था। अस्पताल ने किसी भी तरह की लापरवाही या जबरन बिल बनाने के आरोप को बेबुनियाद बताया है।

  • पुलिस जांच: पुलिस ने परिजनों की शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मरीज की मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों के पैनल से राय लेने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्राइवेट अस्पतालों में मनमानी पर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर प्राइवेट कॉर्पोरेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही कथित 'लूट' और पारदर्शिता की कमी को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और जन-अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि:

  • मेडिकल एथिक्स की अनदेखी: कमर्शियल टार्गेट्स के दबाव में कई बार डॉक्टर और अस्पताल 'मेडिकल एथिक्स' (चिकित्सा नैतिकता) को किनारे रख देते हैं।

  • सख्त नियमों की जरूरत: सरकार को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के रेट, आईसीयू चार्जेस और मेडिकल ऑडिटिंग (Medical Audit) को लेकर सख्त गाइडलाइन्स लागू करनी चाहिए, ताकि कोई भी अस्पताल पैसे की खातिर किसी मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ न कर सके।

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