युद्ध की आहट के बीच ईरान हुआ भारत का मुरीद, जयशंकर की विदेश नीति का दुनिया में बजा डंका

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच ईरान ने एक बार फिर खुले दिल से भारत की तारीफ की है। ईरान ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दुनिया के लिए एक मिसाल बताया है। तेहरान का मानना है कि वैश्विक दबावों के बावजूद भारत जिस तरह से अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए फैसले ले रहा है, वह काबिले तारीफ है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हैं।भारत की ‘इंडिपेंडेंट फॉरेन पॉलिसी’ का कायल हुआ ईरानईरान के शीर्ष नेतृत्व और राजनयिकों ने भारत के रुख की सराहना करते हुए कहा कि नई दिल्ली किसी भी खेमेबाजी का हिस्सा बने बिना अपनी राह खुद चुनती है। रूस-यूक्रेन संकट हो या खाड़ी देशों के बीच का तनाव, भारत ने हमेशा संवाद और कूटनीति का रास्ता चुना है। ईरान का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नेतृत्व में भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी महाशक्ति के दबाव में आकर अपने पुराने मित्रों और रणनीतिक रिश्तों को नहीं छोड़ता।व्यापार और चाबहार पोर्ट पर बढ़ती नजदीकीईरान की इस तारीफ के पीछे रणनीतिक कारण भी छिपे हैं। भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह को लेकर हुआ समझौता न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि मध्य एशिया से जुड़ने के लिए भी बेहद अहम है। ईरान जानता है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापारिक हितों को संतुलित रखने की कोशिश की है। ईरान ने साफ कहा है कि भारत जैसे उभरते हुए वैश्विक पावरहाउस के साथ रिश्ते मजबूत करना उसकी प्राथमिकता है।ग्लोबल साउथ की आवाज बना भारतईरानी अधिकारियों के मुताबिक, भारत आज केवल अपनी बात नहीं कर रहा, बल्कि वह ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की बुलंद आवाज बनकर उभरा है। ईरान ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत की विदेश नीति अब केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। युद्ध की विभीषिका के बीच भारत का यह संतुलित रवैया उसे विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।