ईरान-इजरायल युद्ध का खतरा भारत ने तैयार किया प्लान-बी, तेल और गैस के संकट से निपटने को सेना ने संभाली कमान

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के गहराते बादलों के बीच भारत अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग अगर भीषण रूप लेती है, तो इसका सीधा असर भारत की तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ सकता है। इस संभावित खतरे को देखते हुए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सेना ने एक व्यापक रणनीतिक खाका तैयार किया है, ताकि युद्ध की स्थिति में भी देश की रफ्तार न थमे।’हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ पर सेना की पैनी नजरभारत की सबसे बड़ी चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर है, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है। ईरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देता रहा है। भारतीय नौसेना ने इस रूट पर अपने युद्धपोतों की गश्ती बढ़ाने और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई है। सेना का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि खाड़ी देशों से आने वाले भारतीय टैंकरों को कोई नुकसान न पहुंचे।रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार: संकट के लिए ‘इमरजेंसी बैकअप’सरकार ने देश के भीतर बने विशाल ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) को हाई अलर्ट पर रखा है। भारत के पास विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में भूमिगत कच्चे तेल का बड़ा भंडार मौजूद है। यदि युद्ध के कारण तेल की सप्लाई चेन टूटती है, तो भारत के पास इतना स्टॉक है कि वह कई हफ्तों तक बिना किसी बाहरी मदद के अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है। सेना और पेट्रोलियम मंत्रालय इस भंडार के वितरण तंत्र को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।वैकल्पिक रूट और नए साझेदारों की तलाशभारतीय कूटनीति और सैन्य रणनीतिकार अब केवल एक रास्ते पर निर्भर नहीं रहना चाहते। युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल की आवक सुनिश्चित करने के लिए रूस और अफ्रीका के देशों से आपूर्ति बढ़ाने पर चर्चा तेज हो गई है। इसके साथ ही, भारत अपने पश्चिमी तट पर सुरक्षा घेरा मजबूत कर रहा है ताकि समुद्र के रास्ते होने वाली किसी भी घुसपैठ या हमले को नाकाम किया जा सके।घरेलू स्तर पर ‘राशनिंग’ और सुरक्षा का खाकासूत्रों के अनुसार, यदि संकट लंबा खिंचता है, तो सेना और सरकार मिलकर ईंधन के उपयोग को लेकर नई गाइडलाइंस जारी कर सकते हैं। आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे, इसके लिए लॉजिस्टिक नेटवर्क को सेना की निगरानी में रखा जा सकता है। यह ‘मेजर प्लांट’ न केवल तेल की कमी को रोकेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में कीमतों में होने वाले उछाल से भारतीय उपभोक्ताओं को बचाने की भी कोशिश करेगा।