युवाओं की नाराजगी और सवर्णों के गुस्से के बीच यूपी में योगी आदित्यनाथ क्यों बने हुए हैं BJP के सबसे बड़े ट्रंप कार्ड

देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील राज्य उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। लगातार दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने तीसरी बार सत्ता में वापसी की ऐतिहासिक चुनौती खड़ी है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों, रोजगार को लेकर प्रतियोगी छात्रों और युवाओं के बीच पनप रहे आक्रोश, यूजीसी इक्विटी नियमों को लेकर सवर्ण जातियों के भीतर उपजे असंतोष और जातिगत गोलबंदी ने भाजपा रणनीतिकारों की पेशानी पर बल ला दिए हैं। आंतरिक सर्वे और पार्टी का एक बड़ा धड़ा जमीनी स्तर पर युवाओं के असंतोष को लेकर निरंतर सतर्क कर रहा है। इन तमाम झंझावातों और राजनीतिक चुनौतियों के बीच भगवा दल के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत स्वीकार्यता और जन-अपील आज भी बरकरार है। सियासी माहौल को भाजपा के अनुकूल मोड़ने की पूरी कमान खुद मुख्यमंत्री ने अपने हाथों में ले ली है।
यूपी में माहौल बदलने की कमान योगी के हाथों में: युवाओं के असंतोष को साधने के लिए सरकारी मशीनरी सक्रिय
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी को लेकर विपक्षी दल लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। युवा वर्ग के गुस्से को भांपते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीधे तौर पर प्रशासनिक दखल बढ़ाया है। द इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने युवाओं की चिंताओं को दूर करने और सरकारी व गैर-सरकारी क्षेत्रों में रोजगार सृजन को पारदर्शी बनाने के लिए कई नीतिगत निर्णय लिए हैं।
ठेकेदारी प्रथा और आउटसोर्सिंग में होने वाले शोषण को जड़ से खत्म करने के लिए योगी सरकार ने 'उत्तर प्रदेश कॉर्पोरेशन फॉर आउटसोर्सिंग सर्विसेज' (UPCOS) का गठन किया है। इस निगम का मुख्य उद्देश्य राज्यभर के विभिन्न विभागों में कार्यरत 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन, ईपीएफ, ईएसआई और सेवा सुरक्षा के कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है, जिससे उनके परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिल सके। सरकार यह संदेश देने की पूरी कोशिश कर रही है कि वह अस्थाई कर्मियों की मांगों के प्रति संवेदनशील है।
साढ़े नौ साल में 9.3 लाख नौकरियां: पुलिस-शिक्षक भर्ती, युवा उद्यमी विकास अभियान और फैमिली कार्ड
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न मंचों से सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार ने अपने पिछले साढ़े नौ वर्षों के कार्यकाल में बिना किसी भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के 9.3 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियों में नियुक्तियां दी हैं। आगामी चुनावी वर्ष को देखते हुए राज्य के गृह और शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर सिपाहियों, उपनिरीक्षकों और बेसिक-माध्यमिक शिक्षकों की भर्ती के लिए विशेष समयबद्ध अभियान चलाए जा रहे हैं।
स्वरोजगार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान' को जमीनी स्तर पर लागू किया गया है, जिसके तहत युवाओं को बिना ब्याज या न्यूनतम ब्याज दर पर सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने के लिए पूंजीगत सहायता दी जा रही है। साथ ही, कॉलेज के मेधावी छात्रों के लिए सरकारी विभागों और औद्योगिक इकाइयों में पेड (स्टाइपेंड युक्त) इंटर्नशिप योजनाएं शुरू की गई हैं। सामाजिक न्याय को सटीक बनाने के लिए सरकार ने 'सेंट्रलाइज्ड फैमिली कार्ड' प्रणाली भी शुरू की है। इसके जरिए ऐसे परिवारों की सटीक पहचान की जा रही है जिनके घर में एक भी सदस्य के पास सरकारी या निजी क्षेत्र में स्थाई रोजगार नहीं है, ताकि कल्याणकारी योजनाओं और स्वरोजगार कार्यक्रमों में उन्हें पहली प्राथमिकता दी जा सके।
यूजीसी इक्विटी नियमों पर सवर्णों की नाराजगी: आरक्षण विरोधी आंदोलन से भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें
भाजपा के कोर वोट बैंक माने जाने वाले सवर्ण (ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य और कायस्थ) समुदाय के एक बड़े हिस्से में हाल के दिनों में नाराजगी की सुगबुगाहट देखी गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में कथित जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए 'इक्विटी नियमों' को लेकर विवाद गहराया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन विवादित नियमों पर रोक लगा दी, लेकिन इसके बाद भी सवर्ण छात्रों और सामाजिक संगठनों में असंतोष की ज्वाला शांत नहीं हुई।
हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' में सवर्ण युवाओं की भारी मौजूदगी ने सत्ताधारी दल के थिंक-टैंक को अलर्ट कर दिया है। सवर्ण तबके का मानना है कि उच्च शिक्षा में इस तरह के प्रावधान सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए अवसरों को सीमित करते हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां सवर्ण मतदाता चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं, यह नाराजगी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी का कारण बन सकती है। विपक्षी दल भी इस असंतोष को भुनाने की ताक में हैं।
अपराध पर जीरो टॉलरेंस और 'महिला सुरक्षा': योगी आदित्यनाथ की सबसे अभेद्य राजनीतिक ढाल
राजनीतिक उठापटक, छात्र आंदोलनों और जातिगत समीकरणों की खींचतान के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत उनकी 'कठोर प्रशासक' वाली छवि और कानून-व्यवस्था (लॉ एंड ऑर्डर) का रिकॉर्ड है। 'माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश' और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार द्वारा अपनाई गई 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' ने आम जनता, विशेषकर महिला मतदाताओं के बीच एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (उज्ज्वला, आवास योजना, जनधन खाते) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'मिशन शक्ति' कार्यक्रम ने मिलकर राज्य में एक समर्पित 'साइलेंट महिला वोट बैंक' तैयार किया है। यह महिला वर्ग जाति और बिरादरी की सीमाओं से ऊपर उठकर कानून-व्यवस्था के नाम पर योगी के साथ खड़ा दिखाई देता है। राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पूर्व योगी सरकार महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण, सुरक्षा पेंशन और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए कई बड़ी लोकलुभावन योजनाओं का ऐलान करने जा रही है, जो विरोधी दलों के जातिगत चक्रव्यूह को भेदने में भाजपा का सबसे अचूक अस्त्र साबित होगा।