युवाओं को पछाड़ हासिल की कामयाबी, अब IIM की तैयारी; जानिए बेटे ने सुनाई पिता की अद्भुत प्रेरणादायक कहानी

उम्र महज एक आंकड़ा है, इस बात को 64 वर्षीय एक बुजुर्ग ने सच कर दिखाया है। जहां इस उम्र में लोग अक्सर रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी जीने की सोचते हैं, वहीं इस जाबांज ने इंजीनियरिंग की दुनिया में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने न केवल MTech की पढ़ाई पूरी की, बल्कि अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर अपने से कई गुना युवा छात्रों को पीछे छोड़ते हुए क्लास में टॉप किया है। अब उनका लक्ष्य यहीं नहीं रुक रहा, बल्कि वे अगले कदम के रूप में IIM (भारतीय प्रबंधन संस्थान) में दाखिले की तैयारी में जुटे हैं। उनके बेटे ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की इस संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक कहानी को साझा किया है, जो इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
बुढ़ापे को चुनौती देकर इंजीनियरिंग में हासिल की बड़ी उपलब्धि
आज की पीढ़ी जहां नई तकनीक और पढ़ाई के बोझ से घबराती है, वहां 64 साल के इस पिता का जोश किसी भी युवा से कहीं ज्यादा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर मन में सीखने की प्रबल इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। MTech की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई बार कठिन विषयों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। क्लास के अन्य युवा छात्रों के साथ कदमताल करते हुए उन्होंने न केवल कोर्स पूरा किया, बल्कि टॉपर बनकर यह दिखा दिया कि ज्ञान की कोई उम्र नहीं होती। उनकी यह कामयाबी देशभर के उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो उम्र के दबाव में अपने सपनों को छोड़ देते हैं।
अनुशासन और कड़ी मेहनत रही सफलता की कुंजी
बेटे ने बताया कि उनके पिता ने पिछले दो सालों तक पढ़ाई को ही अपनी तपस्या माना। सुबह जल्दी उठकर किताबों में डूब जाना और रात भर असाइनमेंट पूरा करने का जुनून उन्हें किसी पेशेवर छात्र से कम नहीं बनाता था। जब भी उन्हें किसी कठिन विषय को समझने में परेशानी होती, तो वे बिना झिझक अपने से छोटे उम्र के प्रोफेसरों और सहपाठियों से सलाह लेने में संकोच नहीं करते थे। उनकी यही विनम्रता और सीखने की भूख उन्हें क्लासरूम में सबसे अलग बनाती थी। वे मानते हैं कि अगर आप खुद को हमेशा 'छात्र' बनाए रखते हैं, तो आपकी सीखने की क्षमता कभी कम नहीं होती।
अब IIM का सपना और नई चुनौती का स्वागत
MTech की इस शानदार सफलता के बाद अब उन्होंने अपने अगले बड़े लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर लिया है। वे अब मैनेजमेंट के क्षेत्र में अपनी धाक जमाने के लिए IIM की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। बेटे का कहना है कि उनके पिता का यह उत्साह देखकर लगता है कि वे आने वाले वर्षों में भी देश के युवा प्रोफेशनल्स के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। IIM में दाखिला लेना एक कठिन चुनौती है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई में टॉप किया है, उसे देखते हुए कोई भी अचरज नहीं करेगा यदि वे अगले साल किसी IIM के कैंपस में मैनेजमेंट की पढ़ाई करते नजर आएं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई कहानी, लाखों लोगों को मिला मोटिवेशन
जैसे ही उनके बेटे ने पिता की यह कहानी लिंक्डइन और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर साझा की, देखते ही देखते यह वायरल हो गई। इस पोस्ट पर लाखों लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिनमें लोग उन्हें 'प्रेरणा का स्रोत', 'असली हीरो' और 'युवाओं के लिए मिसाल' बता रहे हैं। कई ऐसे लोग जिन्होंने उम्र के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी, उन्होंने अब फिर से किताबें उठाने का संकल्प लिया है। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस जिद की है जो हर किसी को अपनी उम्र को मात देने की ताकत देती है।
समाज और युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारी सीमाएं केवल हमारे मन में होती हैं। समाज में अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि 60 के बाद जीवन केवल आराम के लिए होता है, लेकिन इस बुजुर्ग ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से इस सोच को बदल कर रख दिया है। आज के युवा जो करियर के तनाव में हताश हो जाते हैं, उन्हें इस पिता से सीखने की जरूरत है कि निरंतरता और इच्छाशक्ति के आगे बड़ी से बड़ी डिग्री भी छोटी पड़ जाती है। उनका यह सफर हमें याद दिलाता है कि सफलता पाने के लिए जज्बा किसी उम्र का मोहताज नहीं होता। वे आने वाले समय में देश के लाखों लोगों के लिए एक 'रोल मॉडल' बनकर उभरे हैं।