उत्तर प्रदेश

वंदे मातरम’ पर मायावती का केंद्र सरकार और विपक्ष पर बड़ा हमला: बोलीं- ‘यह कोई पहली बार नहीं, सियासी फायदे के लिए हो रहा विवाद

देश में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार और विपक्षी दलों दोनों पर तीखा प्रहार किया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि देश में यह कोई पहली बार नहीं है जब राष्ट्रीय प्रतीकों या भावनाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए उछाला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों को हवा देते हैं, जिससे आम जनता के असली और बुनियादी मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। मायावती के इस बयान के बाद राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस छिड़ गई है।

राष्ट्रीय प्रतीकों और भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल

मायावती ने अपने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के माध्यम से कहा कि देश के संविधान और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह देखने को मिल रहा है कि हर चुनाव या राजनीतिक अवसर से पहले ऐसे मुद्दों को जानबूझकर सतह पर लाया जाता है। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' जैसी पवित्र रचनाओं और राष्ट्रीय गीतों पर विवाद खड़ा करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी नहीं है। उन्होंने दोनों पक्षों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी देश में बेरोजगारी, महंगाई और गरीबी जैसे गंभीर मुद्दे हावी होने लगते हैं, तब जनता का ध्यान भटकाने के लिए इन भावनाओं को आहत करने वाले हथकंडे अपनाए जाते हैं।

केंद्र सरकार और विपक्ष दोनों पर साधा निशाना

बसपा सुप्रीमो ने केंद्र की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ-साथ विपक्षी दलों के गठबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां सत्ता पक्ष अपनी प्राथमिकताओं से जनता का ध्यान भटकाने में लगा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भी इस जाल में फंसकर केवल बयानबाजी तक सीमित रह गया है। मायावती ने कहा कि देश की जनता अब सब समझ चुकी है और वह इन राजनीतिक दलों की चालों को भली-भांति पहचानती है। उन्होंने अपील की कि देश के नागरिकों को रोजगार, शिक्षा और सुरक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि इन अंतहीन बहसों में उलझना चाहिए।

राजनीतिक दलों की प्राथमिकताएं और जनता की उम्मीदें

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान बहुत ही सधा हुआ और रणनीतिक है। एक तरफ जहां तमाम दल अपनी वैचारिक और राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए राष्ट्रवाद और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को तूल दे रहे हैं, वहीं मायावती ने अपनी पार्टी को इन सबसे दूर रखते हुए सीधे तौर पर विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर फोकस करने की कोशिश की है। बसपा हमेशा से यह मानती रही है कि इस तरह के विवाद समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरियां बढ़ाने का काम करते हैं, जबकि देश को इस समय आर्थिक मजबूती और आपसी भाईचारे की सबसे अधिक आवश्यकता है।

आने वाले राजनीतिक समीकरणों पर असर

मायावती के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि बहुजन समाज पार्टी आने वाले दिनों में किसी भी ऐसे विवाद का हिस्सा बनने से बचेगी जो केवल भावनात्मक राजनीति से प्रेरित हो। उनके इस बयान ने उन मतदाताओं को भी साधने का प्रयास किया है जो पारंपरिक दलों की इस तरह की बयानबाजी से त्रस्त हो चुके हैं। हालांकि, देखना यह होगा कि अन्य दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन इतना तय है कि 'वंदे मातरम' को लेकर शुरू हुआ यह नया सियासी अध्याय उत्तर प्रदेश और देश की राजनीति में आने वाले समय में और गर्माहट पैदा करेगा।

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