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यूक्रेन के राहत सामग्री केंद्र पर रूसी बमबारी में 24 लोगों की दर्दनाक मौत, साइबर हमलों से मोबाइलों पर फटे फर्जी परमाणु अलर्ट

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा भीषण और खूनी संघर्ष हर दिन एक नया और दहला देने वाला मोड़ ले रहा है। पूर्वी यूरोप से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां रूस की सेना द्वारा यूक्रेन के जपोरीजिया (Zaporizhzhia) क्षेत्र में एक स्कूल पर किए गए भीषण हवाई हमले में कम से कम 24 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई है। यह स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं था, बल्कि युद्ध पीड़ितों के लिए राहत सामग्री वितरण केंद्र और बेघर हुए शरणार्थियों के ठहरने का मुख्य ठिकाना बना हुआ था। इस दर्दनाक हमले के बाद पूरे यूक्रेन में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच डिजिटल और साइबर युद्ध भी अपने चरम पर पहुंच गया है, जहां मोबाइल एप्स को हैक करके फर्जी परमाणु हमलों के अलर्ट भेजे जाने से भारी अफरातफरी मच गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि जपोरीजिया में हुए इस खूनी हमले और साइबर आतंक के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।

जपोरीजिया के राहत सामग्री वितरण केंद्र पर रूसी बमबारी, बचाव कर्मियों समेत 24 की मौत

यूक्रेन के जपोरीजिया क्षेत्र के एक शांत ग्रामीण इलाके में स्थित स्कूल पर हुए इस हमले ने युद्ध की विभीषिका को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए बताया कि जिस स्कूल को निशाना बनाया गया, वहां युद्ध से पीड़ित आम नागरिकों को भोजन, दवाइयां और अन्य राहत सामग्री वितरित की जा रही थी। इसके अलावा, अपने घरों से बेघर हो चुके दर्जनों शरणार्थियों ने इस स्कूल भवन में शरण ले रखी थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रूसी सेना ने पहले इस स्कूल भवन पर एक हवाई हमला किया, और जब वहां राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ तथा स्थानीय लोग व राहत कर्मी पीड़ितों की मदद के लिए इकट्ठा हुए, तो चंद मिनटों बाद वहां एक और जोरदार मिसाइल दाग दी गई। इस दोहरे हमले (Double-tap strike) के कारण हताहतों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। जपोरीजिया सिटी काउंसिल की सचिव रेजीना खारचेंको ने मीडिया को जानकारी दी है कि इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से कम से कम 27 लोग अभी भी लापता हैं, जिसके चलते मरने वालों की संख्या आने वाले समय में और बढ़ सकती है। मारे गए लोगों में राहत दल के दो बहादुर सदस्य भी शामिल हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद कर रहे थे।

मोबाइल एप्स पर बड़ा साइबर हमला: रूस और यूक्रेन में फर्जी परमाणु अलर्ट से मची अफरातफरी

एक तरफ जहां मैदान-ए-जंग में मिसाइलों और बमों से इंसानी जिंदगियां तबाह हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इस युद्ध का एक नया और खतरनाक डिजिटल मोर्चा भी खुल गया है। हाल ही में दोनों देशों के नागरिकों के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर रहस्यमयी और डरावने साइबर हमलों की खबरें सामने आई हैं।

यूक्रेन ने रूस पर उसके अधिकारिक इमर्जेंसी अलर्ट सिस्टम और मोबाइल एप्स को बड़े पैमाने पर हैक करने का गंभीर आरोप लगाया है। यूक्रेनी नागरिकों के मोबाइल फोन पर अचानक परमाणु हमलों और रासायनिक हथियारों (Chemical Attacks) के खतरे से जुड़े आपातकालीन अलर्ट धड़ाधड़ आने लगे। इन फर्जी और डरावने संदेशों को देखकर लोग बुरी तरह सहम गए और अपनी जान बचाने के लिए भूमिगत ठिकानों या घरों के बेसमेंट की तरफ भागने लगे। यह अफरा-तफरी तब और बढ़ गई जब यह छह दिनों के युद्धविराम के ठीक बाद शुरू हुई।

हाइपरसोनिक मिसाइल और परमाणु हमले के झूठे संदेशों से दहशत का माहौल

यूक्रेन के लोगों के मोबाइल पर प्रसारित होने वाले एक सबसे डरावने अलर्ट में यह दावा किया गया था कि रूस ने अपनी घातक हाइपरसोनिक मिसाइल 'ओरेश्निक' (Oreshnik) में परमाणु बम फिट करके उसे यूक्रेन की तरफ दाग दिया है। इस एक संदेश ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया। लोग जहां थे, वहीं डर के मारे सुरक्षित ठिकानों की तलाश करने लगे।

हालांकि, कुछ ही घंटों के भीतर यूक्रेनी वायुसेना और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को यह अहसास हो गया कि देश का आपातकालीन अलर्ट सिस्टम हैक हो चुका है, क्योंकि ये सभी आपातकालीन संदेश और टेलीग्राम चैट्स रूसी भाषा में प्रसारित हो रहे थे। वायुसेना की त्वरित जांच से यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई वास्तविक हमला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर प्रोपोगंडा और हैकिंग का नतीजा था जिसने आम नागरिकों के बीच जानबूझकर दहशत फैलाने का काम किया।

रूस के भी मोबाइल एप्स हुए साइबर अटैक का शिकार, 'आतेश' ग्रुप पर उठी उंगली

दिलचस्प बात यह है कि केवल यूक्रेन ही नहीं, बल्कि रूस के भीतर भी इसी तरह के बड़े साइबर हमलों की पुष्टि हुई है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' (TASS) ने देश के आपात मामलों के मंत्रालय के हवाले से यह जानकारी दी कि रूसी नागरिकों के मोबाइल एप्स और अलर्ट सिस्टम भी बड़े पैमाने पर साइबर अटैक की चपेट में आए हैं, जिसके कारण रूसी नागरिकों के पास भी भ्रामक और गलत सूचनाएं पहुंच रही हैं।

प्रारंभिक जांच और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल साइबर हमले की जिम्मेदारी यूक्रेन समर्थक एक प्रसिद्ध हैकिंग ग्रुप 'आतेश' (Atesh) ने ली है। इस डिजिटल घुसपैठ के बाद रूसी सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें, पूरी तरह शांत रहें और अपने सामान्य दैनिक कामकाज करते रहें। जपोरीजिया में हुए खूनी जमीनी हमले और दोनों तरफ से चलाए जा रहे इस हाई-टेक साइबर युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि यह संघर्ष अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के सबसे निचले स्तर तक पहुंच चुका है।

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