एजुकेशन

CBSE New Syllabus: कक्षा 9वीं से 11वीं के सिलेबस में ऐतिहासिक बदलाव, अब रटने की टेंशन खत्म

News India Live, Digital Desk: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के विजन को धरातल पर उतारते हुए बोर्ड ने कक्षा 9वीं से 11वीं तक के छात्रों के लिए नया करिकुलम (पाठ्यक्रम) जारी करने का ऐलान किया है। आज यानी 2 अप्रैल को दोपहर 3 बजे एक विशेष वेबिनार के जरिए इस नए सिलेबस की बारीकियों को देश के सामने रखा जाएगा। इस बदलाव का सबसे बड़ा उद्देश्य छात्रों को ‘रट्टा मार’ पढ़ाई से मुक्ति दिलाकर उन्हें ‘स्किल-बेस्ड’ लर्निंग की ओर ले जाना है।रटने की छुट्टी, समझने पर जोरसालों से चली आ रही पारंपरिक शिक्षा पद्धति, जिसमें छात्र केवल परीक्षा पास करने के लिए तथ्यों को रटते थे, अब गुजरे जमाने की बात होने वाली है। NCERT के नए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) के तहत तैयार किए गए इस सिलेबस में कॉन्सेप्ट को गहराई से समझने पर जोर दिया गया है। अब परीक्षाओं में भी सीधे सवाल पूछने के बजाय ‘केस स्टडी’ और ‘एप्लीकेशन बेस्ड’ सवाल अधिक पूछे जाएंगे, ताकि यह पता चल सके कि छात्र ने विषय को वास्तव में कितना समझा है।आधुनिक विषयों का समावेश: AI और कोडिंग भी शामिलकक्षा 9 और 11 को छात्र के करियर की नींव माना जाता है। इसे देखते हुए नए पाठ्यक्रम में भविष्य की जरूरतों का ख्याल रखा गया है। किताबी ज्ञान के साथ-साथ अब छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कोडिंग, फाइनेंशियल लिटरेसी और वोकेशनल ट्रेनिंग जैसे आधुनिक विषयों से जोड़ा जाएगा। इससे छात्र स्कूल से निकलते समय न केवल डिग्री, बल्कि व्यावहारिक कौशल (Practical Skills) के साथ भी लैस होंगे।मूल्यांकन पद्धति (Assessment) में भारी फेरबदलबोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब केवल साल के अंत में होने वाली 3 घंटे की लिखित परीक्षा ही छात्र की काबिलियत का पैमाना नहीं होगी। नए करिकुलम के तहत पूरे साल होने वाली गतिविधियों, प्रोजेक्ट वर्क, क्लासरूम प्रेजेंटेशन और प्रैक्टिकल नॉलेज को रिजल्ट में विशेष महत्व दिया जाएगा। यानी अब ‘फॉर्मेटिव असेसमेंट’ के जरिए छात्र की प्रगति का निरंतर आकलन होगा।शिक्षकों और स्कूलों के लिए नई रणनीतिइस बड़े बदलाव को लागू करने के लिए सीबीएसई ने स्कूलों और शिक्षकों को भी अपनी शिक्षण शैली (Teaching Methodology) बदलने के निर्देश दिए हैं। अब क्लासरूम में ‘एक्टिव लर्निंग’ और ‘ग्रुप डिस्कशन’ को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षकों को छात्रों के भीतर छिपी रचनात्मकता और तार्किक क्षमता (Critical Thinking) को उभारने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।आज दोपहर 3 बजे होने वाले यूट्यूब वेबिनार में बोर्ड के अधिकारी इस नए सिलेबस के रोडमैप और किताबों की उपलब्धता पर सभी संशयों को दूर करेंगे। छात्र, अभिभावक और शिक्षक सीबीएसई के आधिकारिक चैनल पर जुड़कर इस ऐतिहासिक बदलाव के साक्षी बन सकते हैं।

Back to top button