यूपी-गुजरात समेत 7 राज्यों के चुनाव से पहले नहीं होगा सीएम चेहरे का ऐलान, आलाकमान ने बदली रणनीति

देश के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित अगले साल होने वाले सात राज्यों के हाई-प्रोफाइल विधानसभा चुनावों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और अभूतपूर्व सांगठनिक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय नेतृत्व से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, पार्टी आगामी चुनावों में किसी भी भावी मुख्यमंत्री (CM Face) के नाम की अग्रिम घोषणा नहीं करेगी। इसके बजाय, चुनाव पूरी तरह से सामूहिक नेतृत्व और वर्तमान संगठन के दम पर लड़ा जाएगा। पिछले कुछ वर्षों के चुनावी रुझानों और आंतरिक फीडबैक का सूक्ष्म विश्लेषण करने के बाद भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों ने इस नए गेम प्लान पर अपनी अंतिम मुहर लगाई है, जिसका सीधा उद्देश्य चुनावी राज्यों में सफलता के प्रतिशत को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाना है।
सत्ता विरोधी लहर और आंतरिक कलह पर फुल स्टॉप लगाने की तैयारी
पार्टी के बेहद विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा के थिंक-टैंक का मानना है कि चुनाव से पहले ही किसी एक नाम को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने से कई तरह की प्रशासनिक और सांगठनिक चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। इससे न केवल संबंधित राज्य में सत्ता विरोधी माहौल (Anti-Incumbency) को बल मिलता है, बल्कि टिकट वितरण और संगठन के भीतर भी समानांतर गुटबाजी की धाराएं सक्रिय हो जाती हैं। जब सीएम चेहरे की घोषणा नहीं की जाती, तो पार्टी का हर एक कार्यकर्ता और कद्दावर नेता खुद को दौड़ में मानकर पूरी ताकत से चुनावी मैदान में झोंक देता है। इससे विपक्षी खेमे को भी किसी एक चेहरे को टारगेट करने या व्यक्तिगत हमले करने का कोई मौका नहीं मिल पाता है।
वर्तमान मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा चुनाव पर सस्पेंस रहेगा बरकरार
इस रणनीति का एक बेहद दिलचस्प पहलू यह है कि जिन राज्यों में वर्तमान में भाजपा की सरकारें चल रही हैं, वहां चुनाव तो मौजूदा मुख्यमंत्रियों के चेहरे और उनके काम के इर्द-गिर्द ही बुना जाएगा। उन्हें भविष्य में भी बरकरार रखा जा सकता है, लेकिन पार्टी आलाकमान चुनाव खत्म होने और विधायक दल की बैठक होने तक उनके नाम की आधिकारिक घोषणा करने से पूरी तरह बचेगा। वहीं, जिन राज्यों में भाजपा वर्तमान में सत्ता से बाहर है, वहां भी किसी एक प्रादेशिक नेता को आगे करने के बजाय पूरी तरह से सामूहिक नेतृत्व (Collective Leadership) के मॉडल को अपनाया जाएगा, क्योंकि पार्टी का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि इस फॉर्मूले से कार्यकर्ताओं में जबरदस्त ऊर्जा का संचार होता है।
उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत इन 7 राज्यों में मचेगा चुनावी घमासान
आगामी चुनावी कैलेंडर पर नजर डालें तो अगले साल देश के सात महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें से पांच राज्यों में फरवरी-मार्च के दौरान और दो राज्यों में साल के अंत यानी दिसंबर में मतदान होने की संभावना है। इन सात राज्यों में से पंजाब और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी के पांच राज्यों—उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में वर्तमान में भाजपा की डबल-इंजन सरकारें मजबूती से काबिज हैं। भाजपा का मुख्य लक्ष्य इन पांचों राज्यों में अपनी सत्ता को रिकॉर्ड बहुमत के साथ बरकरार रखना है, साथ ही पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे विपक्षी राज्यों में भी प्रचंड जीत दर्ज करना है। ऐसे में भाजपा को पूरा भरोसा है कि उसकी यह नई और आधुनिक चुनावी रणनीति उसे पहले से भी बड़ी ऐतिहासिक सफलता दिलाने में गेमचेंजर साबित होगी।