उत्तर प्रदेश

यूपी में खून के काले खेल पर बड़ी कार्रवाई आगरा, प्रयागराज और गोरखपुर समेत कई जिलों में 10 ब्लड बैंक सील

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले चैरिटेबल ब्लड बैंकों के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीमों ने प्रदेश के 17 जिलों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर और वाराणसी समेत कई जिलों के 10 ब्लड बैंकों में भारी अनियमितताएं और गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद उनका संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।आगरा में सबसे ज्यादा 5 ब्लड बैंकों पर तालाजांच रिपोर्ट के अनुसार, अनियमितताओं के मामले में ताजनगरी आगरा की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। यहां सबसे ज्यादा 5 ब्लड बैंकों को सील किया गया है। बंद किए गए केंद्रों में आगरा चैरिटेबल ब्लड बैंक, जय हिंद चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लाइफ लाइन चैरिटेबल ब्लड सेंटर, श्री बालाजी चैरिटेबल ब्लड सेंटर और श्री जगदंबा चैरिटेबल ब्लड सेंटर शामिल हैं। प्रयागराज में भी दो प्रमुख केंद्रों—हरदेव तिवारी चैरिटेबल ब्लड सेंटर और एसजीएस चैरिटेबल ब्लड सेंटर के संचालन पर रोक लगा दी गई है।गोरखपुर और वाराणसी में भी हुई कार्रवाईमुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर में भी ‘मान्या चैरिटेबल ब्लड सेंटर’ में गड़बड़ी मिलने पर उसे बंद कराया गया है। वहीं वाराणसी में कालिंदी चैरिटेबल ब्लड सेंटर और बनारस चैरिटेबल ब्लड सेंटर पर ताला जड़ दिया गया है। हाथरस के जय मां कैला देवी चैरिटेबल ब्लड सेंटर को भी मानकों का उल्लंघन करने पर बंद कर दिया गया है। इससे पहले लखनऊ और कानपुर में भी 11 से अधिक ब्लड बैंकों पर इसी तरह की कार्रवाई की जा चुकी है।मरीजों की सेहत से हो रहा था ‘भयानक’ समझौताछापेमारी के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं। कई ब्लड बैंकों में डोनर और रिसीवर (खून देने और लेने वाले) का कोई उचित रिकॉर्ड नहीं था। खून की गुणवत्ता जांचने के लिए तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था और कई जगह केवल सतही तौर पर ‘रैपिड टेस्ट’ के नाम पर मरीजों की जान से खेला जा रहा था। एफएसडीए अधिकारियों के मुताबिक, इन केंद्रों पर प्रोफेशनल डोनर नेटवर्क और खाली ब्लड बैग की गुणवत्ता में भी भारी कमी पाई गई।लापरवाह अफसरों पर भी गिरेगी गाजसीएम योगी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल दोषी ब्लड बैंकों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं, बल्कि उनकी निगरानी में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को भी कहा है। सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि बदलते मौसम और संक्रामक बीमारियों के इस दौर में सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला रक्त उपलब्ध कराना पहली प्राथमिकता है। जो ब्लड बैंक सुधार नहीं करेंगे, उनका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।

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