योगिनी एकादशी पर बढ़ा तिथि का कन्फ्यूजन! जानें 11 जुलाई को किसे रखना है व्रत और क्या है पारण का सटीक समय

हिंदू सनातन धर्म में व्रतों की राजा कही जाने वाली एकादशी को लेकर इस बार देश भर के श्रद्धालुओं और ज्योतिषाचार्यों के बीच भारी असमंजस (Confusion) की स्थिति देखी जा रही है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की 'योगिनी एकादशी' (Yogini Ekadashi 2026) की सही तारीख को लेकर भक्त उलझन में हैं कि व्रत 10 जुलाई को था या आज यानी 11 जुलाई को भी रखा जा सकता है। पंचांगीय गणना और सूर्योदय के धार्मिक नियमों के चलते इस बार स्मार्त (Smartha) और वैष्णव (Vaishnava) दोनों परंपराओं के अनुयायियों के लिए व्रत की तिथियां अलग-अलग हो गई हैं। यही मुख्य वजह है कि विभिन्न हिंदू पंचांगों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर व्रत एवं पारण (Parana) को लेकर दो विपरीत जानकारियां सामने आ रही हैं।
स्मार्त अनुयायियों के लिए आज पारण का दिन: सुबह 5:21 से शुरू हो चुका है शुभ मुहूर्त
धार्मिक नियमों और पंचांग के अनुसार, स्मार्त परंपरा (गृहस्थ जीवन जीने वाले श्रद्धालु) का पालन करने वाले भक्तों ने 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का उपवास पूर्ण कर लिया है। ऐसे में 10 जुलाई को व्रत रखने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए आज यानी शनिवार, 11 जुलाई 2026 को द्वादशी तिथि के भीतर पारण करना अनिवार्य है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, आज पारण करने का सबसे श्रेष्ठ और शुभ समय सुबह 05:21 बजे से लेकर सुबह 09:59 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानीय पंचांगों में हरिवासर (Hari Vasara) की समाप्ति के बाद दोपहर 01:24 बजे से शाम 04:09 बजे तक का समय भी पारण के लिए उपयुक्त बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर पारण करने से ही व्रत का संपूर्ण आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।
वैष्णव संप्रदाय आज रख रहा है महा-व्रत: 11 जुलाई को विष्णु मंदिरों में उमड़ी भारी भीड़
इसके विपरीत, वैष्णव परंपरा (संत, संन्यासी और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त) से जुड़े श्रद्धालु आज यानी 11 जुलाई को पूर्ण निष्ठा के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं। उदयकालीन तिथि और द्वादशी युक्त एकादशी को प्राथमिकता देने के कारण वैष्णव मत में आज के दिन को ही मुख्य एकादशी स्वीकार किया गया है। इस कारण आज देश के प्रमुख वैष्णव पीठों और श्री हरि विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, मंगला आरती, अखंड भजन-कीर्तन और विष्णु मंत्रों का जाप किया जा रहा है। वैष्णव पद्धति से व्रत रखने वाले ये श्रद्धालु पूरे दिन फलाहार और निर्जला संकल्प के साथ भगवान नारायण की भक्ति में लीन रहेंगे।
वैष्णव व्रतधारियों के लिए 12 जुलाई के पारण का समय: जानें कब खुलेगा उपवास
11 जुलाई को योगिनी एकादशी का महा-व्रत रखने वाले वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए अगले दिन यानी रविवार, 12 जुलाई 2026 को पारण करने की शास्त्रीय व्यवस्था दी गई है। पंचांग के अनुसार, 12 जुलाई को पारण करने का अत्यंत शुभ समय सुबह 05:22 बजे से लेकर सुबह 08:09 बजे तक रहेगा। शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में और हरिवासर का समय बीत जाने के बाद ही किया जाना चाहिए। यदि किसी अपरिहार्य कारणवश या यात्रा आदि की वजह से कोई श्रद्धालु इस तय समय में पारण नहीं कर पाता है, तो उसे अपने कुलगुरु, ज्योतिषी या पारिवारिक लोकाचार की परंपरा के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
समस्त पापों से मुक्ति दिलाती है योगिनी एकादशी: विष्णु सहस्रनाम के पाठ का है विशेष विधान
पौराणिक और धार्मिक ग्रंथों में योगिनी एकादशी के महत्व का अत्यंत विस्तार से वर्णन किया गया है। यह एकादशी साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम दिन मानी जाती है। इस पावन अवसर पर विष्णु सहस्रनाम (Vishnu Sahasranamam) का सामूहिक पाठ करने, तुलसी दल अर्पित करने और जरूरतमंद तथा ब्राह्मणों को अन्न-वस्त्र का दान देने से जातक को अनजाने में हुए बड़े से बड़े पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में छाई दरिद्रता दूर होती है और मानसिक शांति, पारिवारिक सुख व आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष स्मार्त और वैष्णव गणना के इस सूक्ष्म अंतर को समझकर ही भक्तों को अपनी साधना संपन्न करनी चाहिए।