देश

राजा रवि वर्मा की 130 साल पुरानी पेंटिंग ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 167 करोड़ में बिकी यशोदा-कृष्णा

News India Live, Digital Desk : भारतीय चित्रकला के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की लगभग 130 साल पुरानी दुर्लभ पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्णा’ नीलामी में 167.20 करोड़ रुपये में बिकी है। इसके साथ ही यह भारत की सबसे महंगी बिकने वाली पेंटिंग बन गई है। 1890 के दशक में बनाई गई यह कृति आज भी उतनी ही जीवंत लगती है, जितनी एक सदी पहले थी। आइए जानते हैं उस कलाकार के बारे में जिसने देवी-देवताओं को ‘चेहरा’ दिया और भारतीय कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।कौन थे राजा रवि वर्मा? (Who was Raja Ravi Varma)राजा रवि वर्मा का जन्म 29 अप्रैल 1848 को केरल के त्रावणकोर के किलिमन्नूर गांव में हुआ था। उन्हें भारतीय कला का पितामह कहा जाता है क्योंकि उन्होंने ही भारतीय चित्रों को विदेशों तक पहुँचाया। आज हमारे घरों और दुकानों में भगवानों की जो तस्वीरें दिखती हैं, उनके पीछे रवि वर्मा का ही विजन है। उन्होंने महाकाव्यों और पुराणों के पात्रों को रंगों के माध्यम से सजीव किया। 2 अक्टूबर 1906 को 58 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी कला आज भी अरबों की कीमत रखती है।5 साल की उम्र से ही दीवारों पर उकेरने लगे थे कलारवि वर्मा की प्रतिभा बचपन से ही दिखने लगी थी। मात्र 5 साल की उम्र में वे घर की दीवारों पर चॉक से चित्र बनाया करते थे। उनके इस हुनर को उनके चाचा ने पहचाना और उन्हें शुरुआती पेंटिंग तकनीक सिखाई। बाद में वे तिरुवनंतपुरम के महल गए, जहाँ उन्हें विभिन्न रंगों और कला की बारीकियों को समझने का मौका मिला। उनकी लगन ने उन्हें उस दौर का सबसे बड़ा चित्रकार बना दिया।भारतीय पात्र और यूरोपीय तकनीक का अनूठा संगमराजा रवि वर्मा ने रामा स्वामी नायडू से वॉटर कलर पेंटिंग और डच आर्टिस्ट थिओडोर जेंसन से ऑयल पेंटिंग की शिक्षा ली थी। उन्होंने अपनी पेंटिंग्स में यूरोपीय तकनीक (European Technique) और ऑयल कलर्स का इस्तेमाल किया, जिससे उनके द्वारा बनाए गए पौराणिक पात्र (जैसे रामायण और महाभारत के चरित्र) बेहद वास्तविक और ‘रियल’ नजर आते थे। उनकी इसी शैली ने भारतीय आर्ट को एक नई पहचान दी।जब विवादों में घिरे और जलाई गई प्रेस1894 में राजा रवि वर्मा ने एक लिथोग्राफिक प्रेस खोली ताकि भगवान की पेंटिंग्स की कॉपियां कम दाम में आम लोगों तक पहुँच सकें। हालांकि, उनका सफर विवादों से भी भरा रहा। उन्होंने उर्वशी और रंभा जैसी अप्सराओं की न्यूड पेंटिंग्स बनाई थीं, जिसका उस दौर में कड़ा विरोध हुआ। विरोध इतना बढ़ गया कि उनकी प्रेस तक जला दी गई। लेकिन तमाम विवादों के बावजूद, उन्होंने आम आदमी के मन में ईश्वर की छवि को जिस तरह स्थापित किया, वह अतुलनीय है।

Back to top button