देश

लिंडसे ग्राहम के बाद भी अमेरिकी संसद में बैठे हैं भारत के 60 ‘दुश्मन’, रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचाने की बड़ी साजिश

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों के बावजूद वाशिंगटन के सत्ता के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारत समर्थक और प्रभावशाली अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सक्रिय परिदृश्य से हटने के बाद भी अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) के भीतर भारत विरोधी लॉबिंग कमजोर नहीं हुई है। खुफिया और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में इस समय लगभग 60 ऐसे सीनेटर और प्रतिनिधि मौजूद हैं, जो लगातार भारत की वैश्विक नीतियों, रक्षा सौदों और संप्रभुता के खिलाफ एक सुनियोजित एजेंडा चला रहे हैं। यह भारत विरोधी गुट आने वाले दिनों में नई दिल्ली के रणनीतिक हितों को गंभीर खतरे में डालने के लिए कानून और प्रतिबंधों का एक गुप्त खाका तैयार कर रहा है।

जानिए कौन हैं ये 60 अमेरिकी सांसद और क्या है इनका एजेंडा

अमेरिकी संसद के भीतर सक्रिय इस भारत विरोधी गुट में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों—डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन—के कुछ कट्टरपंथी और वामपंथी झुकाव वाले नेता शामिल हैं। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस गुट का मुख्य एजेंडा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को निशाना बनाना है। रूस के साथ भारत के गहरे रक्षा और ऊर्जा संबंध, चीन सीमा पर भारत का कड़ा रुख और कश्मीर तथा मानवाधिकारों जैसे आंतरिक मुद्दों को लेकर ये सांसद लगातार अमेरिकी प्रशासन पर भारत के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दबाव बना रहे हैं। ये नेता अमेरिकी संसद में ऐसी रिपोर्ट और प्रस्ताव पेश करने की फिराक में हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

भारत के रक्षा और व्यापारिक समझौतों पर रोक लगाने की बड़ी साजिश

इस गुप्त रणनीति के तहत यह 60 सदस्यीय गुट भारत को मिलने वाली आधुनिक अमेरिकी सैन्य तकनीक (जैसे प्रीडेटर ड्रोन और जेट इंजन सौदे) पर रोक लगाने या उनमें देरी कराने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा, भारत के बढ़ते आईटी सेक्टर, फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट और वीजा नियमों (H-1B Visa) को और अधिक सख्त बनाने के लिए भी अमेरिकी संसद में पिछले दरवाजे से लॉबिंग की जा रही है। अगर यह गुट अपने मंसूबों में कामयाब होता है, तो इसका सीधा असर भारतीय टेक कंपनियों और अमेरिकी बाजार पर निर्भर रहने वाले करोड़ों भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, जो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों से अपना कामकाज संभालते हैं।

वाशिंगटन में सक्रिय भारत विरोधी लॉबिंग को कैसे ध्वस्त करेगी नई दिल्ली?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि लिंडसे ग्राहम जैसे पुराने और अनुभवी भारत मित्रों की कमी निश्चित रूप से खलेगी, लेकिन भारत की कूटनीतिक टीम इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका में मौजूद भारतीय दूतावास और मजबूत भारतीय-अमेरिकी समुदाय (Indian Diaspora) ने कैपिटल हिल में इस भारत विरोधी नैरेटिव को काउंटर करने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। लखनऊ और दिल्ली के थिंक-टैंक का कहना है कि भारत अब रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में अमेरिका के लिए एक अपरिहार्य साझेदार बन चुका है, इसलिए अमेरिकी संसद में बैठे कुछ मुट्ठी भर नेताओं के चाहने से भी दोनों देशों के मजबूत और ऐतिहासिक रिश्तों की बुनियाद को हिला पाना बेहद मुश्किल होगा।

 

Back to top button