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वर्किंग वुमन हैं तो सावधान! सेहत को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, साल में एक बार जरूर कराएं ये 5 जरूरी टेस्ट

भागदौड़ भरी जिंदगी, ऑफिस का डेडलाइन प्रेशर और घर-बाहर की दोहरी जिम्मेदारी के बीच आज की कामकाजी महिलाएं अपनी सेहत को सबसे पीछे छोड़ देती हैं। समय की कमी के चलते कई बार छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती हैं। डॉक्टर्स का मानना है कि 30 की उम्र पार करते ही वर्किंग महिलाओं को अपनी हेल्थ को लेकर 'प्रोएक्टिव' होने की जरूरत है। आज हम आपको उन 5 अनिवार्य हेल्थ चेकअप्स के बारे में बता रहे हैं, जो हर कामकाजी महिला के लिए साल में एक बार बेहद जरूरी हैं, ताकि आप न केवल स्वस्थ रहें बल्कि अपनी कार्यक्षमता भी बरकरार रख सकें।

1. थायराइड फंक्शन टेस्ट (TFT): वजन और ऊर्जा के लिए जरूरी

ज्यादातर वर्किंग महिलाएं अक्सर थकान, अचानक वजन बढ़ने या घटने और बालों के झड़ने की समस्या से जूझती हैं। इसे अक्सर काम का तनाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यह थायराइड असंतुलन का लक्षण हो सकता है। साल में एक बार टीएसएच (TSH), टी3 (T3) और टी4 (T4) टेस्ट कराना अनिवार्य है ताकि थायराइड ग्रंथि सही से काम कर रही है या नहीं, इसका पता चल सके।

2. बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA Scan): हड्डियों की मजबूती की जांच

ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने और धूप की कमी के कारण महिलाओं में विटामिन-डी और कैल्शियम की भारी कमी देखी जा रही है। उम्र के साथ महिलाओं की हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) के जरिए आप अपनी हड्डियों के घनत्व की जांच करा सकती हैं और भविष्य में होने वाले फ्रैक्चर या जोड़ों के दर्द से बच सकती हैं।

3. पैप स्मीयर और ब्रेस्ट स्क्रीनिंग (Mamography): कैंसर से बचाव के लिए

महिलाओं में सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन शुरुआती स्टेज में पकड़े जाने पर इनका इलाज पूरी तरह संभव है। 30-35 वर्ष की आयु के बाद हर महिला को साल में एक बार गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लेकर 'पैप स्मीयर टेस्ट' और 'मेमोग्राफी' करानी चाहिए। यह छोटी सी सतर्कता जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा कवच का काम करती है।

4. लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर टेस्ट: दिल की सेहत के लिए

वर्कप्लेस का स्ट्रेस सीधे आपके दिल और ब्लड शुगर लेवल पर असर डालता है। खराब लाइफस्टाइल और बाहर के खाने की वजह से कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और डायबिटीज का खतरा आम है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से आपको अपने हार्ट हेल्थ की स्थिति पता चलेगी, वहीं HbA1c टेस्ट के जरिए आप अपने पिछले तीन महीनों के शुगर लेवल का सही आकलन कर सकती हैं।

5. विटामिन प्रोफाइल और हीमोग्लोबिन चेक: एनीमिया से मुक्ति

क्या आपको काम के दौरान बार-बार चक्कर आते हैं या सांस फूलती है? यह एनीमिया यानी खून की कमी का सीधा संकेत है। कामकाजी महिलाओं में हीमोग्लोबिन और विटामिन-बी12 की कमी सबसे आम है, जो आपकी प्रोडक्टिविटी को घटाती है। साल में एक बार सीबीसी (CBC) और विटामिन प्रोफाइल टेस्ट करवाकर आप अपनी एनर्जी लेवल को हमेशा हाई रख सकती हैं।

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