उत्तर प्रदेश

विश्व हिंदू परिषद की बड़ी मांग; डांडिया और गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगे पूर्ण प्रतिबंध, नवरात्र पर रहेगी कड़ी नजर

आगामी शारदीय नवरात्र के त्योहार को लेकर देश भर में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा, अनुशासन और धार्मिक गरिमा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। इसी सिलसिले में दक्षिणपंथी और सांस्कृतिक संगठनों ने कड़े कदम उठाने की वकालत शुरू कर दी है, जिसमें विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल जैसे प्रमुख संगठनों ने आक्रामक रुख अख्तियार किया है। संगठनों ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि देश भर में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया उत्सवों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए। आयोजनों को केवल एक पारंपरिक और धार्मिक पर्व के रूप में संरक्षित करने की बात कहते हुए वीएचपी ने साफ कर दिया है कि उत्सव के पंडालों में प्रवेश देने से पहले हर व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना अब बेहद जरूरी हो गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या सांस्कृतिक व्यवधान से बचा जा सके।

पहचान पत्र की जांच और सुरक्षा गार्डों की तैनाती का कड़ा निर्देश

विश्व हिंदू परिषद और उसके आनुषंगिक संगठनों ने इस बात पर जोर दिया है कि गरबा पंडालों और डांडिया नाइट के आयोजकों को इस बार सुरक्षा के मोर्चे पर बेहद सतर्क रहना होगा। संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन आयोजनों के कमर्शियल होने और भीड़भाड़ बढ़ने के कारण कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जो धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के विपरीत थीं। इसे रोकने के लिए वीएचपी ने मांग की है कि प्रवेश द्वार पर ही सुरक्षाकर्मियों या स्वयंसेवकों द्वारा सख्त चेकिंग की व्यवस्था की जाए। हर व्यक्ति को पंडाल के अंदर प्रवेश पाने के लिए अपना आधिकारिक पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होना चाहिए ताकि यह पुष्टि हो सके कि पंडाल में आने वाला व्यक्ति उसी समुदाय से है जिसके लिए यह पारंपरिक उत्सव आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों को इस संबंध में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर एक सुदृढ़ सुरक्षा चक्र तैयार करने की सलाह दी गई है।

लव जिहाद और पहचान छुपाकर प्रवेश करने के मामलों पर कड़ी निगरानी

वीएचपी के इस कड़े रुख के पीछे मुख्य तर्क यह दिया जा रहा है कि कई बार शरारती तत्व या अन्य समुदायों के लोग अपनी पहचान छुपाकर इन सांस्कृतिक आयोजनों में प्रवेश करते हैं, जिससे त्योहारों का माहौल खराब होता है और सामाजिक सौहार्द को भी ठेस पहुंचती है। संगठन का यह भी दावा है कि गरबा पंडालों का उपयोग कई बार सोची-समझी रणनीति के तहत अन्य एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाले इन भव्य आयोजनों में महिला सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद भी पंडालों के भीतर पैनी नजर रखें। यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति बिना वैध पहचान के या नियमों के विरुद्ध प्रवेश करने की कोशिश करता है, तो उसे तुरंत पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाए। इस प्रकार के सुरक्षा उपायों से न केवल आयोजनों में अनुशासन बना रहेगा बल्कि समाज के भीतर किसी भी प्रकार के तनाव की आशंका को भी समय रहते टाला जा सकेगा।

प्रशासन और स्थानीय समितियों से सहयोग की अपील और आयोजनों पर पहरा

विश्व हिंदू परिषद ने केवल मांग उठाने तक ही सीमित न रहकर प्रशासनिक तंत्र और स्थानीय आयोजन समितियों से भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि गरबा और डांडिया कराने वाली हर छोटी-बड़ी कमेटियों को सरकार और पुलिस प्रशासन के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए। पुलिस प्रशासन को भी संवेदनशील इलाकों और बड़े पंडालों के आसपास सुरक्षा बल तैनात करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी असामाजिक तत्व को हुड़दंग मचाने का मौका न मिले। वीएचपी के स्थानीय कार्यकर्ता इस बार नवरात्र के दौरान पूरी मुस्तैदी के साथ मैदान में उतरेंगे और हर पंडाल की व्यवस्था पर अपनी पैनी निगाह रखेंगे। सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा और त्योहारों की मूल भावना को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया यह कदम इस बार के नवरात्र उत्सवों में एक बड़ा और चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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