धर्म

वृंदावन का तटिया स्थान वह रहस्यमयी धाम जहां ,आज भी नहीं पहुंचा कलयुग बिजली-मशीन सब वर्जित

News India Live, Digital Desk: वृंदावन की गलियों में एक ऐसी जगह छिपी है, जहां कदम रखते ही समय का पहिया कई सदियां पीछे घूम जाता है। इसे ‘तटिया स्थान’ (Tatiya Sthan) के नाम से जाना जाता है। इस स्थान के बारे में सबसे अद्भुत बात यह कही जाती है कि यहां आज तक ‘कलयुग’ का प्रवेश नहीं हुआ है। कलयुग से तात्पर्य यहां ‘मशीनी युग’ से है। आज के आधुनिक दौर में भी यह स्थान तकनीक, बिजली और शोर-शराबे से पूरी तरह अछूता है, जो इसे अध्यात्म के शिखर पर ले जाता है।क्यों पड़ा इसका नाम ‘तटिया स्थान’?इस स्थान का इतिहास संगीत सम्राट स्वामी हरिदास और उनके संप्रदाय से जुड़ा है। हरिदास संप्रदाय के सातवें आचार्य, स्वामी ललित किशोरी देव जी ने 18वीं शताब्दी में एकांत साधना के लिए इस निर्जन स्थान को चुना था। जंगली जानवरों और बाहरी व्यवधान से बचने के लिए उन्होंने बांस की लकड़ियों का घेरा (बाड़) बनाया था। ब्रज की स्थानीय भाषा में बांस की लकड़ियों से बनी इस बाड़ को ‘तटिया’ कहा जाता है, इसीलिए इस दिव्य स्थान का नाम ‘तटिया स्थान’ पड़ गया।यहां की अनोखी परंपराएं और नियमतटिया स्थान में प्रवेश करते ही आपको एक अलग ही दुनिया का अनुभव होगा। यहां के नियम बेहद सख्त और प्रकृति के अनुकूल हैं:तकनीक पर पाबंदी: यहां बिजली का उपयोग नहीं किया जाता। पंखे, लाइट या मोबाइल फोन यहां पूरी तरह वर्जित हैं। रात के समय यहां केवल मिट्टी के दीयों और मोमबत्तियों का प्रकाश होता है।प्राकृतिक सुंदरता: यहां नीम, पीपल और कदंब के प्राचीन वृक्ष हैं, जिन्हें भगवान कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। यहां की मिट्टी (रज) को भी परम पवित्र माना जाता है, जिसमें भक्त और यहां के बंदर लोट लगाते दिख जाएंगे।शांति और संयम: यहां जोर से बोलना, चिल्लाना या मोबाइल से फोटो खींचना मना है। साधु-संत यहां निर्जन कुटियों में रहकर मौन साधना और ‘प्रिया-प्रियतम’ (राधा-कृष्ण) के ध्यान में लीन रहते हैं।सात्विक जीवन: यहां आज भी लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनता है और आधुनिक मशीनों का कोई अस्तित्व नहीं है।स्वामी हरिदास और संगीत का नातातटिया स्थान स्वामी हरिदास संप्रदाय की मुख्य गद्दियों में से एक है। स्वामी हरिदास वही महान संत थे जिनके संगीत से प्रसन्न होकर बांके बिहारी जी प्रकट हुए थे। आज भी इस स्थान पर शास्त्रीय संगीत और ‘समाज गायन’ की परंपरा जीवित है। यहां बिना किसी माइक या लाउडस्पीकर के पदों का गायन होता है, जिसकी मधुर ध्वनि आत्मा को शांति प्रदान करती है।दर्शन और आरती का समय (2026 गाइड)अगर आप शांति और एकांत की तलाश में यहां जाना चाहते हैं, तो समय का विशेष ध्यान रखें:सुबह के दर्शन: 08:30 AM से 12:00 PM तकशाम के दर्शन: 05:30 PM से 08:30 PM तकआरती: सुबह करीब 09:30 AM और शाम को सूर्यास्त के समय।

Back to top button