शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में बड़ी प्रगति: दिल्ली से पूर्वांचल का सफर होगा बेहद आसान, घट जाएगी यात्रा की दूरी और समय

यदि आप दिल्ली, एनसीआर या हरियाणा से गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती या पूर्वांचल के अन्य जिलों की यात्रा करते हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी और राहतभरी खबर है। आने वाले वर्षों में इस रूट पर आपका सफर पूरी तरह बदलने वाला है। देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक 739.95 किलोमीटर लंबे शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को लेकर एक नया और अहम प्रशासनिक पड़ाव पार कर लिया गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस मेगा प्रोजेक्ट के 391.77 किलोमीटर लंबे दूसरे चरण (पुवायां से गोरखपुर) के लिए फाइनल फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन मंजूरी) का आवेदन कर दिया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद शामली से गोरखपुर की लगभग 12 घंटे की लंबी यात्रा घटकर मात्र 7.5 घंटे रह जाएगी।
आइए इस बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी खास बातों को विस्तार से समझते हैं:
1. शानदार कनेक्टिविटी और यात्रा के समय में भारी कमी
यह एक्सप्रेसवे केवल एक सामान्य सड़क मार्ग नहीं है, बल्कि यह दिल्ली-एनसीआर से पूर्वांचल तक बनने वाले एक नए हाई-स्पीड रोड कॉरिडोर का मुख्य आधार होगा।
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रूट कनेक्शन: एक्सप्रेसवे का पहला चरण शामली के पास उस मुख्य जंक्शन से शुरू होगा, जहां दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे आपस में मिलते हैं। इसका मतलब है कि दिल्ली से चलने वाला वाहन सीधे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से होते हुए इस नए एक्सप्रेसवे पर पहुंच सकेगा।
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ट्रैफिक से राहत: इससे मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद और पारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच मालवाहक वाहनों (Logistics) की आवाजाही बेहद तेज और सुगम हो जाएगी।
2. दो चरणों में बंटा है 740 किलोमीटर का यह मेगा एक्सप्रेसवे
एनएचएआई ने इस विशाल परियोजना को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए दो प्रमुख हिस्सों में बांटा है:
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फेज-1: शामली से पुवायां (शाहजहांपुर) – 348.18 किलोमीटर
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फेज-2: पुवायां से गोरखपुर – 391.77 किलोमीटर
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दोनों चरणों को मिलाकर इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 739.95 किलोमीटर होगी।
इसके अलावा इस परियोजना में 42.2 किलोमीटर का मुरादाबाद स्पर भी शामिल किया गया है, जो मुख्य एक्सप्रेसवे को एनएच-9 (NH-9) से जोड़ेगा। इससे मुरादाबाद और आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। दिलचस्प बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा उत्तराखंड से भी गुजरेगा, जिससे दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
3. ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड हाइवे की खासियत
यह पूरा एक्सप्रेसवे एक ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड प्रोजेक्ट होगा, यानी इसे पूरी तरह नई भूमि पर विकसित किया जा रहा है। रास्ते में कोई अनियंत्रित कट या प्रवेश बिंदु नहीं होंगे। वाहन केवल निर्धारित इंटरचेंज से ही एक्सप्रेसवे पर आ या जा सकेंगे, जिससे तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही सुरक्षित और निर्बाध बनी रहेगी।
प्रस्तावित अलाइनमेंट के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे अयोध्या शहर के बीच से नहीं गुजरेगा, लेकिन इसका कॉरिडोर अयोध्या मंडल के काफी करीब रहेगा, जिससे भविष्य में राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी बेहतरीन सड़क संपर्क का लाभ मिलेगा।
4. कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
फिलहाल एनएचएआई ने इस परियोजना की किसी आधिकारिक पूर्णता तिथि की घोषणा नहीं की है। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट वन मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं से गुजर रहा है। हालांकि, डीपीआर (DPR) पूरी होने के बाद उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद लगभग तीन साल के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद अब निर्माण कार्य की दिशा में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।