‘शायद कल भी हमला कर दें…’ ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर फिर गरजे डोनाल्ड ट्रंप

पश्चिम एशिया में जारी भारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच युद्ध का एक नया और विनाशकारी बवंडर उठने की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक और बड़े सैन्य हमले की संभावना से कतई इनकार नहीं किया है। व्हाइट हाउस से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक ट्रंप का ताजा रुख तेजी से सुर्खियों में छाया हुआ है। पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने बेहद आक्रामक तेवर में कहा कि अमेरिका किसी भी पल ईरान पर कार्रवाई को अंजाम दे सकता है। जब उनसे यह सीधा सवाल पूछा गया कि अमेरिका ईरान पर सैन्य प्रहार करने के कितने करीब पहुंच चुका है, तो ट्रंप ने अपने ही अंदाज में पलटवार करते हुए कहा कि क्या आपको सच में लगता है कि अगर मैं कोई बड़ा हमला करने जा रहा हूं, तो पहले से मीडिया को बता दूंगा? उन्होंने आगे दो टूक लहजे में जोड़ा कि शायद कल ही यह कार्रवाई हो जाए, इसकी पूरी-पूरी संभावना बनी हुई है। ट्रंप के इस संक्षिप्त मगर घातक संकेत ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में सनसनी मचा दी है।
हालांकि, अपने इस कड़े सैन्य रुख के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला कूटनीतिक पहलू भी खुला रखा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी एक बेहद सकारात्मक और ऐतिहासिक समझौता हो सकता है। ट्रंप के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व वास्तव में समझौता करने का इच्छुक है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तेहरान अपनी शर्तों और वैश्विक प्रतिबद्धताओं पर टिक पाएगा। इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह संकेत दिया था कि आगामी तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले कोई नया हमला नहीं होगा, परंतु पत्रकारों के सामने दिए गए उनके इस ताजा बयान ने सैन्य कार्रवाई की समयसीमा को लेकर भारी अनिश्चितता खड़ी कर दी है।
तेहरान का पलटवार: मसूद पेजेश्कियान ने वाशिंगटन पर लगाया शांति वार्ता बिगाड़ने का आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस आक्रामक रुख पर ईरान की ओर से भी बेहद तीखी और सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सरकारी टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए सीधे तौर पर अमेरिका को शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा करार दिया। पेजेश्कियान ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने शीर्ष अधिकारियों को संकट टालने और एक न्यायसंगत समझौता पूरा करने की स्पष्ट हिदायत दी थी। ईरानी पक्ष पूरी गंभीरता के साथ कूटनीतिक मेज पर बैठा था, लेकिन ऐन वक्त पर वाशिंगटन ने स्थापित नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए पूरी वार्ता प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने साफ कर दिया कि अमेरिकी प्रशासन की दोहरी चालों के चलते बातचीत बेनतीजा साबित हुई है।
इसी बीच ईरानी संसद के शक्तिशाली अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने भी अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। गलीबाफ ने कहा कि व्हाइट हाउस ने ईरान की सामरिक शक्ति और जनभावना का पूरी तरह गलत आकलन किया है। गलत अनुमान लगाकर ईरान के साथ सीधा टकराव मोल लेने के कारण अमेरिका खुद एक ऐसे रणनीतिक दलदल में फंस चुका है जिससे निकलना अब उसके लिए नामुमकिन होता जा रहा है। गलीबाफ ने कहा कि इस विकट संकट को पैदा करने वाला वाशिंगटन ही है, इसलिए अब इस भारी नुकसान से उबरने की जिम्मेदारी भी पूरी तरह अमेरिका के कंधों पर है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी दृढ़ता दिखाते हुए कहा कि सैन्य हमलों की नई धमकियां ईरान की संप्रभु नीतियों को रत्ती भर भी नहीं बदल सकतीं। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान फारस की खाड़ी के अपने पड़ोसी अरब मुल्कों के साथ शांतिपूर्ण सहयोग और सुरक्षा साझेदारी के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।
होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया रहस्य: पाकिस्तानी मध्यस्थता के दावों पर तेहरान की दो टूक
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस सैन्य तनाव का सबसे संवेदनशील केंद्र बिंदु होर्मुज स्ट्रेट बन चुका है। यह संकरा समुद्री जलमार्ग पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा रोजाना गुजरता है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी खबरें तेजी से फैली थीं कि ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया बैकचैनल प्रस्ताव भेजा है। इन खबरों में दावा किया गया था कि यदि अमेरिकी नौसेना खाड़ी क्षेत्र से अपनी सख्त समुद्री नाकेबंदी हटा लेती है, तो ईरान भी होर्मुज स्ट्रेट से सभी प्रकार के व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की निर्बाध आवाजाही की अनुमति देने के लिए राजी है।
पाकिस्तान में नियुक्त ईरानी राजदूत के एक बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रतिबंध और नाकेबंदी हटने की सूरत में होर्मुज को सामान्य आवागमन के लिए खोला जा सकता है। परंतु इस खबर के जोर पकड़ते ही ईरान की आधिकारिक और अर्धसरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने शीर्ष रणनीतिक सूत्रों के हवाले से इस दावे का खंडन कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के समक्ष ऐसा कोई नया औपचारिक प्रस्ताव नहीं रखा गया है। इस विरोधाभासी स्थिति ने वैश्विक तेल बाजार और शिपिंग कंपनियों के बीच भारी असमंजस पैदा कर दिया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में जरा सी भी सैन्य हलचल पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा सकती है।
बंदर अब्बास के ऊपर अमेरिकी लुकास ड्रोन मार गिराने का दावा, बारूद के ढेर पर मध्य पूर्व
तनाव के इस विस्फोटक माहौल के बीच हालात तब और नाजुक हो गए जब रविवार को ईरानी सेना ने एक बड़ा सैन्य दावा पेश किया। ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने सैन्य सूत्रों के हवाले से खबर दी कि ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने दक्षिणी तटवर्ती रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे एक अमेरिकी लुकास ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी सेना का कहना है कि यह मानवरहित अमेरिकी जासूसी ड्रोन उनकी संप्रभु सीमा का उल्लंघन कर खुफिया निगरानी करने की कोशिश कर रहा था, जिसे रडार पर ट्रैक करते ही मिसाइल दागकर हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया गया।
हालांकि, ईरानी सेना के इस सनसनीखेज दावे की किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की जा सकी है और अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन की ओर से भी इस कथित घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बंदर अब्बास के ऊपर अमेरिकी ड्रोन गिराए जाने की घटना सच साबित होती है, तो यह चिंगारी सीधे तौर पर पूर्ण सैन्य टकराव का रूप ले सकती है। एक तरफ जहां फारस की खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोत और परमाणु पनडुब्बियां मुस्तैद हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने भी अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और तटीय रक्षा प्रणालियों को 'हाई अलर्ट' पर रख दिया है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस आसन्न महायुद्ध को टाल पाएगी या फिर डोनाल्ड ट्रंप की यह चेतावनी एक नए वैश्विक संकट का बिगुल साबित होगी।