विदेश

शुक्र है पीएम मोदी पर कोई कॉपीराइट नहीं!” जब इंडोनेशियन राष्ट्रपति ने सरेआम खोला यह बड़ा राज, ठहाकों से गूंज उठा पूरा हॉल

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाला वाकया सामने आया है, जिसने वैश्विक मंच पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया है। एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने खुले मंच से यह स्वीकार किया कि वह अपनी नीतियों और शासन व्यवस्था में पीएम मोदी को फॉलो यानी कॉपी करते हैं। उन्होंने बेहद मजाकिया लहजे में कहा कि "यह भगवान का शुक्र है कि प्रधानमंत्री मोदी पर कोई कॉपीराइट नहीं है, वरना हम बड़ी मुश्किल में पड़ जाते।" इस अनूठे खुलासे के बाद कार्यक्रम में मौजूद तमाम वैश्विक नेताओं और मेहमानों के ठहाकों से पूरा हॉल गूंज उठा।

वैश्विक मंच पर जब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने बांधे तारीफों के पुल

यह ऐतिहासिक वाकया दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए आयोजित एक समिट के दौरान हुआ। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत की डिजिटल क्रांति, जन कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में जो मुकाम हासिल किया है, वह दुनिया के विकासशील देशों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल (Role Model) है। इसी विकास मॉडल से प्रभावित होकर इंडोनेशिया भी अपनी कई राष्ट्रीय योजनाओं को भारत की तर्ज पर ही तैयार कर रहा है।

'कॉपीराइट' वाले बयान पर क्यों ठहाके लगाने लगे वैश्विक नेता?

संबोधन के दौरान जब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने हल्के-फुल्के अंदाज में पीएम मोदी की नकल करने की बात कही, तो हॉल का माहौल बेहद खुशनुमा हो गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की काम करने की गति, जनता से जुड़ने का अनूठा अंदाज और उनकी दूरदर्शी सोच इतनी प्रभावी है कि कोई भी राष्ट्रप्रमुख उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। उन्होंने मुस्कुराते हुए पीएम मोदी की तरफ देखा और कहा कि हम आपकी अच्छी नीतियों को अपने देश में लागू कर रहे हैं, और हमें खुशी है कि इसके लिए हमें किसी 'बौद्धिक संपदा अधिकार' या कॉपीराइट (Copyright) के उल्लंघन का नोटिस नहीं मिलेगा। इस मजेदार टिप्पणी पर खुद पीएम मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

भारत के 'डिजिटल इंडिया' और 'यूपीआई' मॉडल के दीवाने हैं कई देश

यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष ने पीएम मोदी या भारत की नीतियों की इस तरह सराहना की हो। इंडोनेशिया विशेष रूप से भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम (UPI), वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के लिए चलाई जा रही जनधन योजना और कोविड प्रबंधन के दौरान अपनाई गई तकनीकी रणनीतियों का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा है। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि वे अपने देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर कई अन्य घरेलू तकनीकी परियोजनाओं (Geographical & Digital Joint Ventures) पर भी काम कर रहे हैं।

बढ़ता वैश्विक कद और भारत की 'सॉफ्ट पावर' का नया प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों (Global Dynamic Analysts) का मानना है कि विदेशी मंचों पर भारत के प्रधानमंत्री को मिलने वाला यह सम्मान और उनकी नीतियों को अपनाने की अन्य देशों की यह इच्छा, असल में भारत की मजबूत होती 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) का सीधा प्रमाण है। आज दुनिया के बड़े-बड़े देश भारत की विकास यात्रा को न केवल करीब से देख रहे हैं, बल्कि अपने यहां भी उसे दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति का यह बयान दिखाता है कि भारत अब केवल वैश्विक एजेंडा का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह दुनिया के सामने विकास की नई परिभाषा तय कर रहा है।

 

Back to top button