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सिरसा: बैसाखी से पहले ही खेतों में चली दरांती, खराब मौसम के डर से गेहूं की कटाई में जुटे किसान; पैदावार घटने की आशंका

सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले के रोड़ी और आसपास के गांवों में गेहूं की कटाई का काम जोरों पर शुरू हो गया है। आमतौर पर इस क्षेत्र के किसान बैसाखी पर्व (14 अप्रैल) के बाद ही फसल की कटाई शुरू करते हैं, लेकिन इस बार बदलते मौसम के मिजाज और बेमौसम बारिश के डर ने किसानों को समय से पहले खेतों में उतार दिया है।अपनी साल भर की मेहनत को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए किसान अब मजदूरों के साथ-साथ कंबाइन मशीनों का भी सहारा ले रहे हैं।मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत ने बढ़ाई टेंशनफसल कटाई के सीजन में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजदूरों की उपलब्धता है। किसानों का कहना है कि इस समय मजदूरों की भारी किल्लत (Shortage of Labour) चल रही है, जिसके कारण उनकी दिहाड़ी और मजदूरी के दाम भी आसमान छू रहे हैं।कंबाइन का सहारा: मजदूर न मिलने के कारण मजबूरी में कई किसान कंबाइन मशीनों से कटाई करवा रहे हैं। हालांकि, इसमें गेहूं की निकासी तो जल्दी हो जाती है, लेकिन पशुओं के लिए चारे (तूड़े) की किल्लत हो जाती है।पारंपरिक तरीका: छोटी जोत वाले किसान अभी भी हाथों से कटाई को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि थ्रेसर के माध्यम से तूड़ा बनाया जा सके और पशुओं के चारे की व्यवस्था हो सके।खराब मौसम की मार: चमक फीकी और पैदावार में कमीखराब मौसम ने न केवल कटाई के समय को प्रभावित किया है, बल्कि फसल की गुणवत्ता पर भी बुरा असर डाला है। बिंदर सिंह और मल सिंह जैसे स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं की चमक फीकी पड़ गई है और दानों में हल्का कालापन नजर आ रहा है।पैदावार पर असर: किसानों के अनुसार, प्रति एकड़ पैदावार में 5 से 10 मन तक की कमी आने की संभावना है।मंडी भाव की चिंता: दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने से किसानों को डर है कि मंडियों में उन्हें उचित सरकारी भाव मिलने में परेशानी हो सकती है।परिवार सहित खेतों में जुटे अन्नदाताखेतों में आज अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जहां किसान अकेले नहीं बल्कि अपने पूरे परिवार के साथ गेहूं काटते नजर आ रहे हैं। खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए हर कोई जल्द से जल्द फसल समेटने की जुगत में है।

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