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सुप्रीम कोर्ट की रेवड़ी कल्चर पर सर्जिकल स्ट्राइक सब फ्री दोगे तो काम कौन करेगा? राज्यों को कड़ी चेतावनी

News India Live, Digital Desk: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनावी मुफ्त उपहारों (Handouts) पर कड़ा प्रहार किया। कोर्ट ने कहा कि अंधाधुंध मुफ्त वितरण की नीति देश की ‘वर्क कल्चर’ (कार्य संस्कृति) और अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रही है।1. सुप्रीम कोर्ट की 5 बड़ी टिप्पणियांविकास बनाम रेवड़ी: कोर्ट ने कहा, “ज्यादातर राज्य राजस्व घाटे (Revenue Deficit) में हैं, फिर भी वे मुफ्त उपहार बांट रहे हैं। राज्य सरकारें केवल दो काम कर रही हैं वेतन देना और रेवड़ी बांटना। विकास कार्यों के लिए फंड कहां है?”काम कौन करेगा?: CJI ने तीखा सवाल किया, “अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त भोजन, मुफ्त साइकिल और मुफ्त बिजली देंगे, तो फिर काम कौन करेगा? यह संस्कृति देश के भविष्य के लिए घातक है।”असली जनकल्याण और तुष्टिकरण में अंतर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गरीबों और असमर्थों की मदद करना ‘वेलफेयर’ है, लेकिन बिना किसी भेदभाव के अमीर-गरीब सबको सब कुछ मुफ्त देना केवल ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ है।अर्थव्यवस्था पर बोझ: पीठ ने चेतावनी दी कि इस तरह की नीतियों से राज्यों पर कर्ज का बोझ असहनीय होता जा रहा है, जिससे लंबी अवधि में बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और रोजगार सृजन ठप हो जाएगा।जवाबदेही तय हो: कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर पूछा है कि इन ‘अतार्किक मुफ्त उपहारों’ को रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।2. किन राज्यों पर गिरी गाज?हालांकि टिप्पणी सामान्य थी, लेकिन कोर्ट ने विशेष रूप से उन राज्यों का जिक्र किया जहां बिजली, पानी और नकद हस्तांतरण (Cash Transfer) जैसी योजनाएं बिना किसी आर्थिक आधार के लागू की जा रही हैं। तमिलनाडु की बिजली सब्सिडी योजना पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब टैरिफ तय हो चुका था, तो उसे अचानक मुफ्त करने की क्या तुक थी?आगे क्या होगा?सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को एक व्यापक संवैधानिक बहस का हिस्सा माना है। मार्च 2026 में इस पर विस्तृत सुनवाई होगी, जिसमें कोर्ट यह तय कर सकता है कि क्या चुनाव से पहले ‘मुफ्त उपहारों’ का वादा करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) के तहत ‘भ्रष्टाचार’ या ‘रिश्वत’ की श्रेणी में आता है या नहीं।

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