सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का हाई-प्रोफाइल मामला, 13 जुलाई को हो सकती है सबसे बड़ी सुनवाई

अयोध्या के भव्य और ऐतिहासिक राम मंदिर में देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चंदे (दान राशि) में कथित हेराफेरी और चोरी का गंभीर मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे चुका है। मंदिर परिसर के भीतर दान राशि की गिनती के दौरान हुई इस कथित धांधली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है, जिस पर आगामी 13 जुलाई को अहम सुनवाई होने की पूरी संभावना है। इस याचिका में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने और एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन की पुरजोर मांग की गई है।
छुट्टियों के बाद 'नियमित बेंच' करेगी राम मंदिर चंदे पर सुनवाई
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे पहले बीते 29 जून को सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन (Vacation) बेंच ने इस मामले की अर्जेंट हियरिंग या तत्काल हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया था। उस वक्त शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि गर्मी की छुट्टियों के समाप्त होने के बाद इस पूरे प्रकरण को नियमित बेंच (Regular Bench) के समक्ष उचित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (List) किया जाएगा। अब चूंकि 13 जुलाई से सुप्रीम कोर्ट की नियमित अदालती कार्रवाई दोबारा पूरी तरह शुरू होने जा रही है, ऐसे में याचिका का सिस्टम जेनरेटेड स्टेटस (System Generated Status) भी यही संकेत दे रहा है कि इसे 13 जुलाई को ही सुनवाई के लिए पटल पर रखा जा सकता है। हालांकि, अंतिम कॉज लिस्ट आने तक इस तारीख में आंशिक बदलाव की गुंजाइश बनी रहेगी।
एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में क्या हुआ बड़ा खुलासा?
राम मंदिर में दान राशि की सुरक्षा और पारदर्शी गिनती को लेकर चल रही विभागीय जांच के बीच विशेष जांच दल (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। इस जांच रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला नाम के व्यक्ति को पूरे मामले का मुख्य मास्टरमाइंड या मुख्य आरोपी बताया गया है। जांच अधिकारियों को अंदेशा है कि मंदिर परिसर के भीतर करीब 40 दिनों तक यह पूरा खेल चलता रहा, जिसमें दान की रकम की गिनती के दौरान अलग-अलग समय पर चोरी के लगभग 70 मामले (Incidents) सामने आए हैं।
एसआईटी की रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि कथित चोरी का यह पूरा नेटवर्क और प्रकरण अविनाश शुक्ला के इर्द-गिर्द ही घूम रहा था। पुलिस और जांचकर्ताओं द्वारा जब शुक्ला को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, तो उसकी ही निशानदेही पर इस रैकेट में शामिल पांच अन्य आरोपियों की पहचान संभव हो सकी। इसके साथ ही मंदिर के 'दान राशि गणना कक्ष' (Donation Counting Room) के अंदर किस संदिग्ध कार्यप्रणाली (Modus Operandi) के जरिए रुपयों को इधर-उधर किया जा रहा था, इसका भी पूरा भंडाफोड़ हुआ है।
बैंक खातों की जांच में खुली पोल: 15 हजार की सैलरी और लाखों का ट्रांजैक्शन!
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में आने वाले भारी चढ़ावे और चंदे की पारदर्शी गिनती के लिए कुछ विशेष कर्मचारियों और सेवादारों को काम पर रखा है। सरकारी और ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, इन कर्मचारियों को सभी तरह की कटौती (Deductions) के बाद हर महीने महज 15 हजार रुपये से कुछ ही ज्यादा की तनख्वाह या मानदेय मिलता है।
लेकिन जब एसआईटी ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला की गिरफ्तारी से ठीक पहले की बैंकिंग गतिविधियों, बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से स्क्रूटनी की, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। शुक्ला के बैंक खातों में जमा और ट्रांसफर की गई रकम उसकी वैध और ज्ञात आमदनी (15 हजार रुपये महीना) के मुकाबले कई गुना ज्यादा पाई गई। इसी वित्तीय असंतुलन और संदिग्ध लेनदेन को आधार बनाकर अब याचिकाकर्ता ने इस पूरे घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच की गुहार लगाई है।